Meeting of Chota Nagpuriya Teli Utthan Samiti and

छोटा नागपुरिया तेली उत्थान समिति सह ओबीसी मोर्चा की बैठक संपन्न: परिसीमन लागू न होने पर आंदोलन की चेतावनी 

बसिया के केमताटोली में 'छोटा नागपुरिया तेली उत्थान समिति सह ओबीसी मोर्चा' की एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठक आयोजित की गई. यह बैठक समिति के केंद्रीय अध्यक्ष उदाशन नाग की अध्यक्षता में संपन्न हुई.

By : Vaibhaw Vikram
छोटा नागपुरिया तेली उत्थान समिति सह ओबीसी मोर्चा की बैठक संपन्न: परिसीमन लागू न होने पर आंदोलन की चेतावनी 

नीरज कुमार साहू/न्यूज11 भारत
गुमला/डेस्क:
बसिया के केमताटोली में 'छोटा नागपुरिया तेली उत्थान समिति सह ओबीसी मोर्चा' की एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठक आयोजित की गई. यह बैठक समिति के केंद्रीय अध्यक्ष उदाशन नाग की अध्यक्षता में संपन्न हुई. बैठक में मुख्य रूप से गुमला, खूंटी, सिमडेगा सहित कई अन्य जिलों से आए समाज के प्रबुद्ध नागरिकों और प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और समाज के भविष्य व अधिकारों को लेकर गंभीर चर्चा की.

 '60% आबादी होने के बावजूद ओबीसी वर्ग अधिकारों से वंचित'- उदाशन नाग
बैठक को संबोधित करते हुए केंद्रीय अध्यक्ष उदाशन नाग ने झारखंड में परिसीमन (Delimitation) लागू करने की पुरजोर वकालत की. उन्होंने कहा कि झारखंड का समस्त तेली समाज और ओबीसी वर्ग परिसीमन का पूरी तरह समर्थन करता है.'झारखंड में ओबीसी वर्ग जनसंख्या के अनुपात में सबसे बड़ा वर्ग है, जिसकी आबादी लगभग 60% है. इसके बावजूद, हमें हमारे अनुपात के अनुसार न तो राजनीतिक क्षेत्र में, न शिक्षा में और न ही रोजगार के क्षेत्र में हमारा उचित अधिकार मिला है. परिसीमन होना झारखंड के विकास और सामाजिक न्याय के लिए बेहद जरूरी है.

पेसा (PESA) कानून में संशोधन की मांग
उदाशन नाग ने पेसा (पंचायत उपबंध - अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) कानून पर भी गंभीर सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि वर्तमान पेसा कानून में ओबीसी और तेली समाज को उनके समुचित अधिकारों से वंचित रखा गया है. समाज के हितों की रक्षा के लिए इस कानून में तुरंत संशोधन किया जाना चाहिए.

परिसीमन नहीं तो होगा उग्र आंदोलन
बैठक में उपस्थित सभी जिलों के प्रतिनिधियों और समाज के लोगों ने एक सुर में हुंकार भरते हुए कहा कि यदि झारखंड में जल्द से जल्द परिसीमन लागू नहीं किया गया, तो तेली समाज और संपूर्ण ओबीसी वर्ग सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा. वक्ताओं ने साफ तौर पर कहा कि परिसीमन के बिना ओबीसी वर्ग को उनका वास्तविक अधिकार मिलना असंभव है.
 
सामाजिक एकजुटता: बैठक में सुलझाए गए आपसी विवाद
अधिकारों की लड़ाई के साथ-साथ बैठक में सामाजिक समरसता और एकजुटता की भी मिसाल देखने को मिली. इस दौरान समाज से जुड़े कुछ आपसी और पारिवारिक विवादों के मामले भी सामने आए. बैठक में मौजूद समाज के प्रबुद्ध जनों और वरिष्ठ पदाधिकारियों ने सूझबूझ से काम लेते हुए इन मामलों को आपसी सहमति से सुलझा दिया, जिससे कई परिवारों को टूटने से बचा लिया गया.

इस बैठक ने न केवल समाज को अपने राजनैतिक और सामाजिक अधिकारों के लिए जागरूक किया, बल्कि आपसी एकता को भी और मजबूत करने का संदेश दिया. बैठक में मुख्य रूप से प्रदेश अध्यक्ष अरुण साहू, केंद्रीय सचिव दिलीप साहू, सिमडेगा जिला अध्यक्ष जगदीश साहू, खूंटी जिला अध्यक्ष शिवनारायण गंझू, गुमला जिला महासचिव रामेश्वर साहू, भूपेन साहू, बसिया प्रखंड अध्यक्ष भोला साहू, राजू साहू, आदि उपस्थित थे.

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