अनियमितता

भरनो प्रखंड के नगड़ी विद्यालय में एमडीएम ठप,चावल खत्म होने से बच्चों को नहीं मिला भोजन और अंडा

प्रभारी शिक्षिका चावल लाने गईं भरनो, बीपीओ बोले,जांच कर होगी कार्रवाई

By : Pramod Kumar , News11 Bharat
भरनो प्रखंड के नगड़ी विद्यालय में एमडीएम ठप,चावल खत्म होने से बच्चों को नहीं मिला भोजन और अंडा

प्रेम कुमार सिंह/न्यूज 11 भारत

भरनो/डेस्क: भरनो प्रखंड मुख्यालय से लगभग छह किलोमीटर दूर स्थित नव प्राथमिक विद्यालय,नगड़ी में सोमवार को मध्यान्ह भोजन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई.विद्यालय में एमडीएम का चावल समाप्त हो जाने के कारण बच्चों के लिए न तो भोजन बनाया गया और न ही सोमवार को मिलने वाला अंडा वितरित किया गया. इससे विद्यालय पहुंचे छात्र-छात्राओं को खाली पेट ही पढ़ाई करनी पड़ी.जानकारी के अनुसार विद्यालय की प्रभारी प्रधानाध्यापिका रीता बाखला सुबह विद्यालय खोलने के बाद एमडीएम के लिए चावल लाने भरनो चली गईं.उनके विद्यालय से बाहर रहने के दौरान स्कूल में बच्चों के लिए भोजन नहीं बन सका.सोमवार को अंडा वितरण का दिन होने के बावजूद बच्चों को अंडा भी नहीं दिया गया.विद्यालय के छात्रों ने बताया कि शिक्षिका ने उन्हें पहले ही बता दिया था कि स्कूल में चावल खत्म हो गया है,इसलिए सोमवार को मध्यान्ह भोजन नहीं मिलेगा.उन्होंने बच्चों से अपने घर से टिफिन लाने को भी कहा था.जिन बच्चों के पास टिफिन नहीं था,उनमें से कई बच्चे दोपहर में भोजन करने के लिए अपने घर लौट गए,जबकि कुछ बच्चों को बिना भोजन के ही विद्यालय में समय बिताना पड़ा.ग्रामीणों का कहना है कि मध्यान्ह भोजन योजना का उद्देश्य बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना और विद्यालय में उनकी नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना है.ऐसे में चावल खत्म होने के कारण भोजन नहीं बनना और वैकल्पिक व्यवस्था नहीं करना गंभीर लापरवाही को दर्शाता है.मामले की जानकारी दूरभाष के माध्यम से बीआरसी के बीपीओ को दी गई.इस संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि उन्हें इस घटना की जानकारी नहीं थी.उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि विद्यालय में एमडीएम का चावल समाप्त हो जाता है,तो वैकल्पिक व्यवस्था कर भोजन उपलब्ध कराया जाना चाहिए.किसी भी परिस्थिति में मध्यान्ह भोजन बंद नहीं होना चाहिए.उन्होंने पूरे मामले की जांच कराने तथा आवश्यक कार्रवाई करने की बात कही.वहीं इस संबंध में विद्यालय की प्रभारी प्रधानाध्यापिका रीता बाखला का पक्ष जानने के लिए उनसे दूरभाष पर संपर्क करने का प्रयास किया गया,लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया.अब यह देखना होगा कि शिक्षा विभाग इस मामले की जांच के बाद क्या कार्रवाई करता है,ताकि भविष्य में किसी भी विद्यालय में बच्चों को मध्यान्ह भोजन से वंचित न होना पड़े.

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