संतोष श्रीवास्तव/न्यूज़ 11भारत
पलामू/डेस्क: देश को आज़ाद हुए दशक बीत गए... डिजिटल इंडिया की बातें हर तरफ हैं... लेकिन पलामू जिले के चैनपुर प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत अवसाने गांव के बरवा टोला में आज भी ग्रामीण एक बुनियादी हक के लिए तरस रहे हैं. वह हक है—एक अदद साफ और पक्की सड़क. यह चैनपुर प्रखंड का अवसाने गांव के बरवा टोला का मुख्य रास्ता है, जो बरसात आते ही दलदल में तब्दील हो जाता है.
ग्रामीणों का कहना है कि यहाँ पैदल चलना भी मौत को दावत देने जैसा है. बरसात का मौसम यहाँ के लोगों के लिए किसी अभिशाप से कम नहीं है. सबसे खौफनाक स्थिति तब होती है, जब गाँव में कोई बीमार पड़ जाए. अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस का आना तो दूर, लोग मरीज को खटिया पर लादकर ले जाने को मजबूर हैं. ग्रामीणों का एक ही दर्दभरा सवाल है—'देश तो आज़ाद है, लेकिन हमें इस नरक और बरसात की लाचारी से आज़ादी कब मिलेगी?'"
हैरानी की बात यह है कि जनता ने जिस पंचायत मुखिया को अपनी आवाज उठाने के लिए चुना, वो अब बहरे हो चुके हैं. ग्रामीण शिकायतें कर-करके थक चुके हैं, लेकिन प्रशासनिक अमला और स्थानीय जनप्रतिनिधि कुंभकर्णी नींद सो रहे हैं. चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करने वाले नेता आज इस कीचड़ में पैर रखने से भी कतराते हैं." चैनपुर प्रखंड के ये ग्रामीण अब सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि समाधान चाहते हैं. इस विषय पर जब पंचायत मुखिया जितेंद्र यादव से बात करना चाहा तो उन्होंने इस पर कुछ बोलने से इनकार कर दिया