मुख्यमंत्री को पत्र

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने झारखंड कौशल विकास मिशन सोसाइटी फर्जीवाड़े को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लिखा पत्र

ब्लैकलिस्टेड कंपनियों को अवैध भुगतान और करोड़ों रुपये के वित्तीय घोटाले की न्यायिक जांच कराने की मांग

By : Pramod Kumar , News11 Bharat
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने झारखंड कौशल विकास मिशन सोसाइटी फर्जीवाड़े को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लिखा पत्र

न्यूज11  भारत

रांची/डेस्क: नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने झारखंड कौशल विकास मिशन सोसाइटी (JSDMS) में फर्जी बैंक गारंटी, ब्लैकलिस्टेड कंपनियों को अवैध भुगतान एवं करोड़ों रुपये के वित्तीय घोटाले की न्यायिक जांच कराने तथा दोषियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने के संबंध में मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है. उन्होंने अपने पत्र में लिखा-

माननीय मुख्यमंत्री जी,

विषय:- झारखंड कौशल विकास मिशन सोसाइटी (JSDMS) में फर्जी बैंक गारंटी, ब्लैकलिस्टेड कंपनियों को अवैध भुगतान एवं करोड़ों रुपये के वित्तीय घोटाले की न्यायिक जाँच कराने तथा दोषियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने के संबंध में.

झारखंड कौशल विकास मिशन सोसाइटी (JSDMS) से संबंधित जो तथ्य एवं दस्तावेज हमारे सामने उपलब्ध हुए हैं, वे राज्य में वित्तीय अनुशासन, प्रशासनिक जवाबदेही तथा भ्रष्टाचार के विरुद्ध सरकार की प्रतिबद्धता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करते हैं. उपलब्ध अभिलेखों से प्रतीत होता है कि फर्जी बैंक गारंटी देने के आरोप में ब्लैकलिस्ट की गई कंपनियों को नियमों की अनदेखी करते हुए पुनः ब्लैकलिस्ट से बाहर निकालकर करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया तथा बाद में पुनः उन्हें ब्लैकलिस्ट कर दिया गया. यह पूरा प्रकरण एक सुनियोजित वित्तीय अनियमितता एवं भ्रष्टाचार का गंभीर मामला हैं. इस सम्बन्ध में आवश्यक दस्तावेज आपके अवलोकनार्थ संलग्न कर भेज रहा हूँ.
    
दस्तावेजों के अनुसार 8 अगस्त 2024 को तत्कालीन मिशन निदेशक द्वारा छह कंपनियों को फर्जी बैंक गारंटी प्रस्तुत करने का दोषी पाते हुए 7 अगस्त 2026 तक ब्लैकलिस्ट किया गया था. किंतु 14 अक्टूबर 2024 को वर्तमान मिशन निदेशक श्री शैलेंद्र लाल द्वारा इन्हीं कंपनियों को तथाकथित “लोकहित” का हवाला देते हुए ब्लैकलिस्ट से बाहर कर भुगतान का आदेश पारित कर दिया गया. इसके पश्चात विभाग द्वारा लगभग 55 करोड़ रुपये का भुगतान भी कर दिया गया.
    
आश्चर्यजनक रूप से अगस्त 2025 में फर्जी बैंक गारंटी मामले में तत्कालीन उत्पाद सचिव श्री विनय चौबे की गिरफ्तारी के प्रकरण के बाद इन्हीं कंपनियों को पुनः ब्लैकलिस्ट कर दिया गया. यह घटनाक्रम अनेक गंभीर प्रश्न खड़े करता है -

  • जब कंपनियाँ फर्जी बैंक गारंटी देने की दोषी थीं, तो उन्हें ब्लैकलिस्ट से बाहर किसके आदेश पर और किस नियम के तहत निकाला गया?
  • लगभग 55 करोड़ रुपये के भुगतान की अनुमति किस अधिकारी एवं किस स्तर पर दी गई?
  • यदि फर्जी बैंक गारंटी मामले में एक विभाग के सचिव के विरुद्ध आपराधिक कार्रवाई हो सकती है, तो श्रम विभाग के तत्कालीन एवं वर्तमान सचिवों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
  • क्या इस पूरे प्रकरण में किसी प्रभावशाली राजनीतिक अथवा प्रशासनिक संरक्षण के कारण नियमों की अनदेखी की गई ?
  • क्या सरकार पुनः इन्हीं कंपनियों को ब्लैकलिस्ट अवधि समाप्त होने के बाद अगस्त 2026 से सरकारी कार्य एवं भुगतान देने की तैयारी कर रही है ?
  • यह पूरा मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि प्रथम दृष्टया सरकारी धन के दुरुपयोग, पद के दुरुपयोग एवं आपराधिक षड्यंत्र का प्रतीत होता है. इसलिए इसकी निष्पक्ष एवं समयबद्ध जाँच अत्यंत आवश्यक है.

अतः हमारी ओर से निम्नलिखित मांगें की जाती हैं:- 

  1. फर्जी बैंक गारंटी, ब्लैकलिस्टेड कंपनियों को भुगतान तथा सरकारी धन के दुरुपयोग के मामले में श्रम विभाग के तत्कालीन सचिव, वर्तमान सचिव, संबंधित अधिकारियों एवं अन्य दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर आपराधिक कार्रवाई की जाए.
  2. झारखंड कौशल विकास मिशन सोसाइटी के वर्ष 2023-24 से अब तक के सभी वित्तीय एवं प्रशासनिक निर्णयों का विशेष ऑडिट (Special Audit) भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) अथवा किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराया जाए.
  3. जाँच पूरी होने तक इस पूरे प्रकरण से जुड़े अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से उनके वर्तमान दायित्वों से हटाया जाए, ताकि निष्पक्ष जाँच प्रभावित न हो.
  4. ब्लैकलिस्टेड कंपनियों को किए गए लगभग 55 करोड़ रुपये के भुगतान की वैधानिकता की जाँच कर दोषी पाए जाने पर राशि की वसूली सुनिश्चित की जाए.
  5. जब तक जाँच पूरी न हो जाए, संबंधित कंपनियों को किसी भी प्रकार का नया कार्यादेश, भुगतान अथवा सरकारी अनुबंध देने पर तत्काल रोक लगाई जाए.
  6. यदि जाँच में किसी राजनीतिक संरक्षण अथवा उच्च स्तर की संलिप्तता सामने आती है, तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध भी समान रूप से विधिसम्मत कार्रवाई की जाए.
  7. इस पूरे आपराधिक षड्यंत्र में श्री शैलेन्द्र लाल, श्री राजन श्रीवास्तव और श्री विश्वरूप ठाकुर के भूमिका एवं इनके सम्पत्तियों की एसीबी से विशेष जाँच कराई जाए. 
  8. राज्य की जनता यह जानना चाहती है कि फर्जी बैंक गारंटी देने वाली कंपनियों को करोड़ों रुपये का भुगतान किन परिस्थितियों में किया गया तथा इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई. भ्रष्टाचार के विरुद्ध आपकी सरकार के दावों की वास्तविक परीक्षा इसी मामले में निष्पक्ष कार्रवाई से होगी.
  9. आशा है कि आप इस अत्यंत गंभीर विषय पर तत्काल संज्ञान लेते हुए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे. 

सधन्यवाद!

(बाबूलाल मरांडी)

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