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रांची/डेस्क: ग्रामीण विकास विभाग, झारखण्ड सरकार के अंतर्गत झारखण्ड स्टेट लाईवलीहुड प्रोमोशन सोसाईटी (JSLPS) एवं आईआईएम कलकत्ता इनोवेशन पार्क (IIMCIP) के संयुक्त तत्वावधान में आज 'झारखण्ड इन्क्यूबेटर प्रोग्राम' का शुभारंभ किया गया. यह तीन वर्षीय राज्यव्यापी कार्यक्रम ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार से आगे बढ़ाकर सफल उद्यमी बनाने तथा झारखण्ड में महिला नेतृत्व वाले ग्रामीण उद्यमों के लिए एक सशक्त उद्यमिता पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है.
कार्यक्रम का शुभारंभ ग्रामीण विकास मंत्री, दीपिका पाण्डेय सिंह की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ. इस अवसर पर ग्रामीण विकास विभाग, झारखण्ड सरकार के सचिव, मनोज कुमार , जेएसएलपीएस मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी अनन्य मित्तल , गरिमा सिंह, डायरेक्टर-झारक्राफ्ट, हिमांशु जोशी, प्रोग्राम डायरेक्टर- अटल इनोवेशन मिशन, IIM कलकत्ता इनोवेशन पार्क के प्रतिनिधियों सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, विकास साझेदार, शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधि एवं राज्यभर से आए महिला उद्यमी उपस्थित रहे.

कार्यक्रम के दौरान झारखण्ड इन्क्यूबेटर प्रोग्राम, इन्क्यूबेटर तथा हैंडलूम क्लस्टर वेब पोर्टल का शुभारंभ किया गया. यह पोर्टल राज्य के महिला उद्यमियों, बुनकर समूहों एवं अन्य हितधारकों को डिजिटल माध्यम से जोड़ने और बाजार एवं सेवाओं तक उनकी पहुँच सुदृढ़ करने में सहायक होगा.
ग्रामीण विकास विभाग के सचिव ने अपने संबोधन में कहा कि जेएसएलपीएस के ब्रांड ‘पलाश’ और ‘आदिवा’ के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं के हस्तनिर्मित खाद्य एवं गैर-खाद्य उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिल रही है तथा रोजगार के अवसर सृजित हो रहे हैं. इसके साथ ही किसान उत्पादक संगठन भी रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन रही हैं. उन्होंने कहा कि लखपति दीदियों को एक उचित माहौल और मार्गदर्शन की आवश्यकता है, जो आईआईएमसीआईपी के माध्यम से उन्हें प्राप्त होगा.
कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए ग्रामीण विकास मंत्री ने कहा कि समूहों के माध्यम से सरकार की लाभकारी योजनाएं ग्रामीणों तक पहुंच रही हैं और उनकी मेहनत को ‘ब्रांड पलाश’ के माध्यम से सम्मान मिल रहा है, जिससे वे आत्मनिर्भर बन रही हैं. उन्होंने कहा कि आईआईएमसीआईपी के माध्यम से आगामी तीन वर्षों में हैंडहोल्डिंग सपोर्ट मिलेगा, जिससे उनकी आर्थिक प्रगति होगी और वे ‘लखपति’ से ‘करोड़पति’ बनने की दिशा में आगे बढ़ेंगी. साथ ही, इससे अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर सृजित होंगे. उन्होंने इस पहल के लिए अपनी शुभकामनाएं व्यक्त कीं.
यह कार्यक्रम राज्यभर में चयनित 150 महिला नेतृत्व वाले ग्रामीण सूक्ष्म एवं नैनो उद्यमों को उद्यम चयन, मेंटरशिप, व्यवसाय विकास, तकनीकी प्रशिक्षण, वित्तीय एवं बाजार संपर्क, ब्रांडिंग, गुणवत्ता प्रमाणन तथा उद्यम के औपचारिककरण तक समग्र सहयोग प्रदान करेगा. इसके साथ ही रांची में एक केंद्रीय हब तथा राज्य के पाँच प्रमंडलों में स्पोक केंद्रों की स्थापना कर जिला एवं प्रखंड स्तर तक उद्यमिता सहायता तंत्र विकसित किया जाएगा.
कार्यक्रम के प्रथम दिन आयोजित विभिन्न तकनीकी सत्रों एवं पैनल चर्चाओं में 'Livelihoods to Enterprises', ग्रामीण उद्यमिता पारिस्थितिकी तंत्र, ग्रामीण बाजार एवं ब्रांड, महिला उद्यमों का डिजिटलीकरण तथा महिला उद्यमिता में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए.