मुमताज अहमद/न्यूज11 भारत
खलारी/डेस्क: झारखंड उच्च न्यायालय ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के उल्लंघन को आधार बनाते हुए अंचल निरीक्षक कुमार सत्यम भारद्वाज पर लगाए गए अनिवार्य सेवानिवृत्ति के दंड को रद्द कर दिया है. अदालत के आदेश पर कुमार सत्यम भारद्वाज की पुनर्बहाली मंगलवार को गोविन्दपुर अंचल (धनबाद) में हो गई. उल्लेखनीय है कि कुमार सत्यम भारद्वाज पूर्व में खलारी अंचल में सर्किल इंस्पेक्टर के रूप में सेवा दे चुके हैं. मालूम हो कि कुमार सत्यम भारद्वाज ने 24 फरवरी 2026 को जारी उस विभागीय आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्त कर केवल दो-तिहाई पेंशन देने का निर्णय लिया गया था.
उन पर बालूमाथ में सर्किल इंस्पेक्टर के रूप में कार्यरत रहने के दौरान राजस्व अभिलेखों में हेरफेर का आरोप लगाया गया था. सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पाया कि विभागीय जांच में आरोप सिद्ध करने के लिए किसी भी गवाह का परीक्षण नहीं किया गया. आरोप-पत्र में शामिल महत्वपूर्ण गवाहों को भी पेश नहीं किया गया और पर्याप्त साक्ष्य के बिना जांच प्रतिवेदन तैयार कर दंडादेश जारी कर दिया गया.
अदालत ने कहा कि जब किसी विभागीय कार्रवाई का आधार विश्वसनीय साक्ष्य न हो, तब उच्च न्यायालय हस्तक्षेप कर सकता है. न्यायालय ने यह भी माना कि जांच प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं थीं और याचिकाकर्ता के साथ न्यायसंगत व्यवहार नहीं किया गया. इन्हीं आधारों पर अदालत ने अनिवार्य सेवानिवृत्ति का आदेश रद्द कर दिया तथा बकाया वेतन, पदोन्नति और अन्य परिणामी सेवा लाभों पर छह सप्ताह के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया.
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