नशे का जाल

कुडू बना नशेड़ियों का अड्डा, अंधेरा होते ही सड़कों से लेकर सार्वजनिक स्थलों पर सजती है नशे की महफिल

कुडू से रांची तक नशे का बढ़ता जाल और जिम्मेवारों की खामोशी!

By : Pramod Kumar , News11 Bharat
कुडू बना नशेड़ियों का अड्डा, अंधेरा होते ही सड़कों से लेकर सार्वजनिक स्थलों पर सजती है नशे की महफिल

न्यूज11  भारत

कुड़ू/डेस्क: कभी शांत और अनुशासित माने जाने वाला कुडू आज नशाखोरी की बढ़ती प्रवृत्ति से कराह रहा है. यह अब केवल सामाजिक बुराई नहीं रह गई है, बल्कि कानून-व्यवस्था, युवाओं के भविष्य और समाज की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है. हैरानी की बात यह है कि जिन स्थानों पर लोगों की सुरक्षा और सुविधा की व्यवस्था होनी चाहिए, वहीं शाम ढलते ही नशेड़ियों का जमावड़ा लगने लगता है. कृषि फार्म परिसर, बस स्टैंड, बस स्टैंड के पीछे बंगला मोहल्ला और अहद कॉलोनी जाने वाला मार्ग बिना चारदीवारी वाले स्कुल इन दिनों खुलेआम नशाखोरी के केंद्र बन चुके हैं. शराब, सिगरेट, डेंड्रॉइट और व्हाइटनर जैसे नशों में डूबे युवाओं की टोलियां यहां आसानी से देखी जा सकती हैं.

ग्रामीणों का कहना है कि कृषि फार्म वर्षों से नशेड़ियों का अड्डा बना हुआ है, लेकिन प्रशासनिक कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति ही हो पाती है. स्थानीय प्रशसन द्वारा कभी धर पकड़ की जाती है तब कुछ क्षेत्रीय नेताओं द्वारा पैरवी कर छोड़ा लिया जाता है. नतीजा यह है कि नशे का दायरा अब एक क्षेत्र से निकलकर पूरे प्रखण्ड में फैल चुका है. बिना चारदीवारी वाले स्कूल, कृषि फार्म, यात्रियों के लिए बने शेड और सार्वजनिक स्थल तक इनके कब्जे में हैं. सबसे चिंताजनक बात यह है कि नशे की गिरफ्त में आए युवाओं का व्यवहार लगातार असामाजिक होता जा रहा है. महिलाओं, छात्राओं और राहगीरों के लिए कई स्थान असुरक्षित महसूस होने लगे हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि नशे की लत पूरी करने के लिए पैसों की जरूरत पड़ने पर यही लोग चोरी और अन्य आपराधिक घटनाओं को अंजाम देते हैं. हाल ही में राजकीय बुनियादी विद्यालय कुडू के कंप्यूटर कक्ष में हुई चोरी और तोड़फोड़ की घटना ने इस आशंका को और मजबूत किया है.

विद्यालय से बैटरियां चोरी कर ली गईं, कंप्यूटर सिस्टम तोड़ दिए गए और जनरेटर को क्षतिग्रस्त कर उसमें लगे तांबे के कॉयल तक निकाल लिए गए. सवाल यह है कि आखिर ऐसी घटनाएं बार-बार क्यों हो रही हैं? नशे की आग तो अब जिले की छवि भी झुलसा रही है. हाल के दिनों में रांची स्थित आरएसएस कार्यालय पर हुए बम हमले की घटना के बाद भी परिजनों द्वारा युवकों के नशे की गिरफ्त में होने की बात सामने आई. जांच एजेंसियां अपना काम कर रही हैं, लेकिन यह घटना एक बड़ा सवाल छोड़ गई है. क्या समाज और प्रशासन ने नशे की समस्या को तब तक नजरअंदाज किया, जब तक वह गंभीर घटनाओं का कारण नहीं बन गई? जब बच्चे और युवा धीरे-धीरे नशे की दलदल में फंस रहे थे, तब उन्हें बचाने और रोकने की दिशा में प्रभावी प्रयास दिखाई नहीं दिए. आज जब अपराध और हिंसक घटनाएं सामने आ रही हैं, तब हर कोई कारण तलाश रहा है.

सबसे बड़ा सवाल यदि सार्वजनिक स्थानों पर खुलेआम नशा हो रहा है तो इसकी जानकारी जिम्मेदार तंत्र को क्यों नहीं है? यदि जानकारी है तो कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? जब तक कठोर कार्रवाई नहीं होगी, यह समस्या खत्म नहीं होगी. जरूरत है कि पुलिस, प्रशासन, अभिभावक, सामाजिक संगठन और जनप्रतिनिधि मिलकर इस बढ़ते खतरे के खिलाफ व्यापक अभियान चलाएं. क्योंकि आज सवाल केवल कुछ युवाओं का नहीं, बल्कि पूरे समाज के भविष्य का है. यदि समय रहते इस पर लगाम नहीं लगी तो कुडू की सड़कों पर सुलग रही नशे की यह आग आने वाले दिनों में और बड़े सामाजिक व आपराधिक संकट का रूप ले सकती है.

यह भी पढ़ें: "नशा मुक्त भारत अभियान" के तहत शैक्षणिक संस्थानों में विशेष नशा मुक्ति जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

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