नामकुम जमीन घोटाला

रांची: नामकुम जमीन घोटाले की जांच शुरू, ACB ने अंचल अधिकारी समेत कई लोगों के खिलाफ दर्ज की PE

नामकुम इलाके में हुई जमीन की खरीद-बिक्री और अंचल के दस्तावेजों में हुई हेरफेर मामले में ACB ने अंचल अधिकारी समेत कई लोगों के खिलाफ PE दर्ज की है.

By : News11 Bharat
रांची: नामकुम जमीन घोटाले की जांच शुरू, ACB ने अंचल अधिकारी समेत कई  लोगों के खिलाफ दर्ज  की PE

न्यूज़11 भारत 
रांची/डेस्क:
राजधानी रांची के नामकुम इलाके में हुई जमीन की खरीद-बिक्री और अंचल के दस्तावेजों में हुई हेरफेर मामले की जांच  ACB ने शुरू कर दी है. प्रारंभिक जांच में घोटाले और गड़बड़ी की पुष्टि के बाद एजेंसी ने इस मामले में पीई संख्या 3/2026 दर्ज कर अपनी जांच आगे बढ़ा दी है. ACB ने तत्कालीन अंचल अधिकारी श्वेता वर्मा और तत्कालीन डीलिंग असिस्टेंट दीपक कुमार समेत कई लोगों के खिलाफ PE दर्ज की है. एजेंसी ने वर्ष 2012-13 से लेकर वर्ष 2014-15 तक नामकुम अंचल में पदस्थापित रहे कई कर्मचारी और अधिकारियों को रडार पर रखा है. और अगले सप्ताह से सभी लोगों से पूछताछ भी शुरू कर सकती है.

दस्तावेज अंचल कार्यालय से गायब

एसीबी की इंटेलिजेंस कलेक्शन रिपोर्ट (IR) में पाया गया कि डुंडू गांव स्थित खाता संख्या 32 के प्लॉट संख्या 776, 820 और 821, जिनका कुल रकबा 1.22 एकड़ है, की बिक्री डीड संख्या 30931/26404 के माध्यम से की गई थी.जांच के अनुसार, उक्त भूमि का दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) केस संख्या 356 R 27/2013-14 के तहत किया गया था. तत्कालीन अंचल अधिकारी डॉ. श्वेता वर्मा ने 11 मई 2013 को यह म्यूटेशन प्रथम प्रकाश कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक चंद्र प्रकाश धेलिया के नाम पर स्वीकृत किया था. हालांकि, हाईकोर्ट के निर्देश के बाद जब इस भूमि से संबंधित अभिलेखों की तलाश शुरू की गई, तो म्यूटेशन केस से जुड़े मूल दस्तावेज अंचल कार्यालय से गायब पाए गए. एसीबी ने अपनी जांच रिपोर्ट में तत्कालीन डीलिंग असिस्टेंट दीपक कुमार की भूमिका को संदिग्ध बताते हुए मामले में गंभीर अनियमितताओं की आशंका जताई है.

बार-बार मांगने पर भी नहीं मिले दस्तावेज 

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि नामकुम के वर्तमान अंचल अधिकारी कमल किशोर सिंह ने संबंधित फाइलों की खोज और उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए डीलिंग असिस्टेंट दीपक कुमार को कई बार आधिकारिक पत्र भेजे, लेकिन इसके बावजूद आवश्यक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराए गए. एसीबी की जांच में एक और महत्वपूर्ण तथ्य उजागर हुआ कि राजस्व कर्मचारी विक्रम महली का वर्ष 2023 में सेवाकाल के दौरान निधन हो चुका था. आरोप है कि डीलिंग असिस्टेंट दीपक कुमार दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराने के मामले में अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए मृत कर्मचारी के मृत्यु प्रमाण पत्र का हवाला दे रहे थे और इसका लाभ उठाने का प्रयास कर रहे थे.

जांच एजेंसी का मानना है कि अंचल कार्यालय से भूमि से संबंधित महत्वपूर्ण मूल दस्तावेजों का गायब होना महज लापरवाही का मामला नहीं है. रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि इस पूरे प्रकरण में तत्कालीन अंचल अधिकारी डॉ. श्वेता वर्मा, डीलिंग असिस्टेंट दीपक कुमार, तत्कालीन अंचल निरीक्षक तथा अंचल कार्यालय के अन्य कर्मियों और अधिकारियों की भूमिका की भी जांच आवश्यक है. जांच में मामले में मिलीभगत और अनियमितताओं के संकेत मिलने की बात कही गई है.

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