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रांची/डेस्क: सड़क को दूसरी जगह शिफ्ट करने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. कोर्ट ने अधिकारियों को सिर्फ कागजों पर जवाब देने के बजाय मौके पर जाकर स्थिति देखने और फिर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है. अधिकारियों को यह भी बताना होगा कि सड़क को आखिर क्यों शिफ्ट किया गया और वैकल्पिक सड़क की वर्तमान स्थिति क्या है. मामले को लेकर खेमलाल महतो की ओर से जनहित याचिका दाखिल की गई है. जिसपर गुरुवार को मुख्य न्यायाधीश एम. एस. सोनक और न्यायाधीश राजेश शंकर की खंडपीठ ने सुनवाई की.
अधिकारियों को खुद जाना होगा मौके पर
हाईकोर्ट ने धनबाद के डीसी, DGMS ( के डायरेक्टर जनरल और BCCL के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे वास्तव में साइट का दौरा करें. इसके बाद उन्हें कोर्ट में अपना जवाब शपथपत्र के माध्यम से दाखिल करना होगा. कोर्ट ने डीजीएमएस, धनबाद को भी जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. सभी संबंधित शपथपत्र 25 सितंबर 2026 तक दाखिल करने होंगे.
सड़क क्यों बदली, यह भी बताना होगा
कोर्ट ने अधिकारियों से खास तौर पर कहा है कि उनके जवाब में जनहित याचिका में लगाए गए आरोपों का जवाब होना चाहिए. साथ ही सड़क को शिफ्ट करने का कारण और वैकल्पिक सड़क की स्थिति भी स्पष्ट करनी होगी. यानी अब अधिकारियों को कोर्ट के सामने यह बताना होगा कि सड़क को दूसरी जगह ले जाने की जरूरत क्यों पड़ी और नई सड़क की क्या स्थिति है.
हाईकोर्ट ने अधिकारियों को अपने शपथपत्र के साथ जरूरी तस्वीरें भी संलग्न करने का निर्देश दिया है. इससे कोर्ट के सामने मौके की वास्तविक स्थिति भी रखी जा सकेगी. मामले की अगली सुनवाई 1 अक्टूबर 2026 को होगी.
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