नीरज कुमार साहू/न्यूज11 भारत
गुमला/डेस्क: प्रखंड मुख्यालय बसिया पंचायत की मुखिया गुलशन टेटे पर वित्तीय अनियमितता और राजस्व के दुरुपयोग का एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है. बसिया पहाड़टोली बालूघाट से जुड़े इस मामले में प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) सुप्रिया भगत ने कड़ा रुख अपनाते हुए मुखिया को दो दिनों के भीतर जवाब और सारे दस्तावेज जमा करने का अल्टीमेटम दिया है. ऐसा न करने पर मुखिया के खिलाफ वित्तीय गबन का मुकदमा दर्ज कराने की चेतावनी दी गई है.
सरकारी राजस्व का गबन का आरोप
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बसिया पहाड़टोली के बालूघाट से बालू उत्खनन (माइनिंग) के लिए बसिया मुखिया गुलशन टेटे के नाम पर सरकारी चालान निर्गत (जारी) किया गया था. नियमतः इस चालान से प्राप्त होने वाले राजस्व का पूरा ब्यौरा प्रशासन को देना होता है और राशि को सरकारी खाते में जमा करना होता है.
लेकिन, मुखिया द्वारा लगातार नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही थीं. प्रखंड कार्यालय द्वारा बार-बार मांगे जाने के बावजूद मुखिया ने राजस्व का कोई ब्यौरा उपलब्ध नहीं कराया. हद तो यह है कि मुखिया ने इस संबंध में बसिया के पंचायत सेवक तक को अंधेरे में रखा और किसी भी वर्तमान सरकारी खाते में बालू से प्राप्त राजस्व की राशि जमा नहीं की गई.
बीडीओ की दोटूक- 'राजस्व का हो रहा मनमाना उपभोग'
मामले की गंभीरता को देखते हुए बीडीओ सुप्रिया भगत ने मुखिया गुलशन टेटे को एक कड़ा पत्र भेजा है. बीडीओ ने पत्र में साफ तौर पर कहा है कि राजस्व और चालान का ब्यौरा न देना यह दर्शाता है कि खनन चालान से प्राप्त सरकारी राजस्व का मुखिया द्वारा मनमाने ढंग से उपभोग किया जा रहा है. यह सीधे तौर पर घोर वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आता है."
बीडीओ ने अपने आदेश में मुखिया गुलशन टेटे को पत्र मिलने के दो दिनों के भीतर:
- निर्गत किए गए सभी चालानों का पूरा ब्यौरा
- चालान निर्गत करने वाली मुख्य पंजी (रजिस्टर)
- संबंधित बैंक खाते की पासबुक
प्रखंड विकास पदाधिकारी कार्यालय में अनिवार्य रूप से जमा करने का निर्देश दिया है. बीडीओ ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि यदि तय समय सीमा के भीतर ये सारे कागजात और हिसाब जमा नहीं किए गए, तो मुखिया के विरुद्ध वित्तीय गबन (सरकारी पैसे की हेराफेरी) का मामला दर्ज करते हुए आगे की आवश्यक कानूनी व दंडात्मक कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी. इस कार्रवाई के बाद से बसिया प्रखंड के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है. अब देखना यह है कि मुखिया तय समय में पाक-साफ होकर सामने आती हैं या उन पर कानूनी गाज गिरती है.
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