आक्रोश

सड़क और पानी के लिए तरस रहा गांडेय का गुड़ियाडीह , ग्रामीणों ने दी 'रोड नहीं तो वोट नहीं' की चेतावनी

करीब 75 परिवारों और 400 की आबादी वाले गांव में वर्षों से सड़क, पेयजल और शिक्षा की समस्या

By : Pramod Kumar , News11 Bharat
सड़क और पानी के लिए तरस रहा गांडेय का गुड़ियाडीह , ग्रामीणों ने दी 'रोड नहीं तो वोट नहीं' की चेतावनी

भरत मंडल/न्यूज 11 भारत 

गांडेय/डेस्क:  बुधुडीह पंचायत अंतर्गत गुड़ियाडीह गांव आज भी सड़क और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है. करीब 75 परिवारों और लगभग 400 की आबादी वाले इस गांव में वर्षों से सड़क, पेयजल और शिक्षा की समस्या बनी हुई है. ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से गुहार लगाने के बावजूद अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला. नाराज ग्रामीणों ने आगामी चुनाव में रोड नहीं तो वोट नहीं का नारा देते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है.

ग्रामीणों ने बताया कि गांव में लगे चारों चापाकल लंबे समय से खराब पड़े हैं. इसके कारण महिलाओं को प्रतिदिन पड़ोसी गांव से पानी लाकर परिवार की जरूरतें पूरी करनी पड़ रही हैं. गांव में प्राथमिक विद्यालय नहीं होने से बच्चों को करीब तीन किलोमीटर दूर पुतरिया गांव पढ़ने जाना पड़ता है.

ग्रामीणों के अनुसार गांव के एक ओर वन विभाग की जमीन है, जहां विभाग द्वारा ट्रेंच खोद दिए जाने से गांव का मुख्य रास्ता बंद हो गया है. इससे आवागमन पूरी तरह प्रभावित है. बीमार लोगों को अस्पताल ले जाने और आवश्यक कार्यों के लिए गांव से बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया है.

आरती देवी ने कहा कि गांव की समस्या वर्षों पुरानी है, लेकिन आज तक किसी ने समाधान की दिशा में गंभीर पहल नहीं की. गोपाल दास ने कहा कि रास्ता बंद होने से सबसे अधिक परेशानी मरीजों और स्कूली बच्चों को हो रही है. भरत टुडू ने कहा कि यदि जल्द सड़क और पेयजल की व्यवस्था नहीं हुई तो ग्रामीण चुनाव का बहिष्कार करने को मजबूर होंगे.

बुधुडीह पंचायत के मुखिया ने कहा कि गांव तक पक्की सड़क निर्माण में वन विभाग की अनुमति बाधा बनी हुई है. हालांकि खराब पड़े चापाकलों की मरम्मत जल्द कराने का प्रयास किया जाएगा.

इधर गांडेय के अंचलाधिकारी ओमप्रकाश बड़ाई ने कहा कि मामला संज्ञान में है. जल्द ही स्थल निरीक्षण कर ग्रामीणों की आवाजाही के लिए वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी. साथ ही संबंधित विभागों से समन्वय स्थापित कर समस्या के समाधान का प्रयास किया जाएगा.
ग्रामीणों का कहना है कि अब उन्हें आश्वासन नहीं, बल्कि सड़क और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं का स्थायी समाधान चाहिए.

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