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सिमडेगा/डेस्क: जिले में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें रोजगार से जोड़ने के नाम पर संचालित एक संस्था पर गंभीर वित्तीय अनियमितता और महिलाओं से ठगी के आरोप सामने आए हैं. मामला सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज है और पुलिस की जांच में बैंक खातों के माध्यम से हुए लेन-देन को महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है. आरोप है कि बड़ी संख्या में महिलाओं को संस्था से जोड़कर उनसे रकम जमा कराई गई और बाद में उस राशि के इस्तेमाल को लेकर कई सवाल खड़े हो गए.
जानकारी के अनुसार ‘नारी पैड सेवा योजना’ के तहत काम करने वाली विकास सेवा केंद्र फाउंडेशन नामक संस्था ने जिले के पांच प्रखंडों में बड़ी संख्या में महिलाओं से संपर्क किया. महिलाओं को पंचायत कोऑर्डिनेटर बनाने और शुरुआती दौर में करीब पांच हजार रुपये प्रतिमाह तथा बाद में इससे अधिक राशि देने का भरोसा दिलाया गया. इसके बाद महिलाओं को संस्था से जोड़कर उनके माध्यम से बैंक खातों में रकम जमा कराने की प्रक्रिया शुरू हुई.
आरोप है कि संस्था से जुड़े लोगों ने स्थानीय स्तर पर प्रभाव रखने वाले युवाओं को कोऑर्डिनेटर बनाया और महिलाओं से राशि जमा कराई. इससे कई महिलाओं को लगा कि उनका पैसा सुरक्षित है और उन्हें रोजगार के साथ आर्थिक लाभ भी मिलेगा. लेकिन बाद में जब भुगतान और जमा राशि को लेकर सवाल उठने लगे तो पूरे मामले पर संदेह गहराने लगा.
सूत्रों की माने तो संस्था से जुड़े लोगों के सामने आने के बजाय स्थानीय स्तर पर प्रभाव रखने वाले युवाओं को आगे किया गया. बाद में संस्था के हेड के रूप में रांची निवासी ओमप्रकाश का नाम सामने आने की बात कही गई है. पुलिस भी मामले की पड़ताल कर रही है.
मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कुरडेगा क्षेत्र में पूर्व रोजगार सेवक अशोक साय और बानो क्षेत्र में एनिस केरकेट्टा के नाम सामने आए हैं. बताया गया है कि इनके खातों में ऑनलाइन राशि भेजे जाने के स्क्रीनशॉट भी सामने आए हैं. खातों में जमा रकम और उसके बाद हुए लेन-देन की वास्तविक स्थिति बैंक रिकॉर्ड और पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी.
जानकारी के अनुसार, कुरडेगा में करीब 200 महिलाओं से राशि लिए जाने की शिकायत सामने आई है. वहीं बानो क्षेत्र में करीब 150 महिलाओं, जलडेगा और ठेठईटांगर से लगभग 100-100 महिलाओं द्वारा पैसे जमा कराने की बात सामने आ रही है. इसके अलावा कोलेबिरा क्षेत्र से भी महिलाओं के इसी नेटवर्क से जुड़े होने की जानकारी सामने आने का उल्लेख है.
यदि सभी महिलाओं से समान रूप से करीब 40 हजार रुपये लिए जाने की बात सही साबित होती है, तो कुल राशि करोड़ों रुपये तक पहुंच सकती है. हालांकि वास्तविक रकम कितनी है, यह जांच पूरी होने और संबंधित बैंक खातों के रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा.
बैंक खातों की जांच से खुलेगा राज
पूरे मामले में बैंक खातों की जांच सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बनती जा रही है. जांच में यह पता लगाने की जरूरत है कि महिलाओं से जमा कराई गई रकम आखिर कहां गई? किन खातों में रकम ट्रांसफर हुई? कितनी राशि निकाली गई? क्या राशि संस्था के संचालकों या उनसे जुड़े अन्य लोगों के खातों में भेजी गई? नकद निकासी हुई या ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के जरिए रकम आगे पहुंचाई गई?
पुलिस यदि खातों की जांच करती है तो प्रत्येक महिला से जमा हुई रकम से लेकर अंतिम लाभार्थी तक मनी ट्रेल सामने आ सकती है. यही जांच इस पूरे मामले की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकती है.
रोजगार का भरोसा या सुनियोजित जाल?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि महिलाओं को रोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता का भरोसा देकर उनसे रकम क्यों जमा कराई गई और उस रकम का आगे क्या हुआ. यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह सिर्फ वित्तीय अनियमितता का मामला नहीं रहेगा, बल्कि उन महिलाओं के भरोसे के साथ धोखे का मामला भी होगा, जिन्होंने बेहतर भविष्य की उम्मीद में अपनी मेहनत की कमाई लगाई.
मामले में संस्था की पंजीयन स्थिति, संचालकों, पदाधिकारियों, स्थानीय कोऑर्डिनेटरों, बैंक खातों, पूर्व गतिविधियों और महिलाओं से ली गई राशि की जांच की मांग तेज हो रही है. साथ ही यह भी पता लगाने की जरूरत है कि संस्था ने वास्तव में कितनी महिलाओं को रोजगार दिया और कितनी महिलाओं से किस उद्देश्य से राशि ली. फिलहाल पुलिस जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर साफ होगी.
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