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रांची/डेस्क: प्रोजेक्ट भवन, धुर्वा स्थित सभागार में आज वाणिज्य कर मंत्री राधाकृष्ण किशोर की अध्यक्षता में राज्य के राजस्व संग्रहण की विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की गई. बैठक में राज्य के राजस्व संग्रहण की वर्तमान स्थिति, निर्धारित लक्ष्य के विरुद्ध उपलब्धि, व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में किए जा रहे निरीक्षण, लंबित ऑडिट आपत्तियों, न्यायालयों में लंबित मामलों, VAT एवं GST की बकाया राशि तथा राजस्व के संभावित स्रोतों की विस्तार से समीक्षा किया गया.
बैठक में वाणिज्य कर विभाग के सचिव, अपर आयुक्त, संयुक्त आयुक्त, उपायुक्त, सहायक आयुक्त एवं अन्य वरीय पदाधिकारी उपस्थित रहे. राधाकृष्ण किशोर ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राजस्व संग्रहण को केवल लक्ष्य पूर्ति तक सीमित नहीं रखा जाए, बल्कि कर चोरी की रोकथाम और बकाया राजस्व की वसूली को सर्वोच्च प्राथमिकता दिया जाए. उन्होंने कहा कि जिन मामलों में ऑडिट आपत्तियां लंबित हैं, उनमें विभागीय स्तर पर आवश्यक कार्रवाई करते हुए निर्धारित समय सीमा में निष्पादन सुनिश्चित किया जाए.
बैठक में Mines, Real Estate, Jewellery, Cement, Transportation, Scrap Traders सहित राजस्व की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों की विशेष समीक्षा किया गया. श्री किशोर ने कहा कि इन क्षेत्रों में कारोबार के वास्तविक स्तर और घोषित कारोबार के बीच किसी भी प्रकार की विसंगति पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई किया जाए. बैठक में VAT एवं GST से संबंधित बकाया राशि की अद्यतन स्थिति की समीक्षा किया गया. वाणिज्य कर मंत्री ने बड़े बकायेदारों की सूची तैयार कर प्राथमिकता के आधार पर वसूली अभियान चलाने का निर्देश दिया.
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय में केंद्र के स्तर पर लिए गए विभिन्न गलत निर्णयों से झारखंड के वित्तीय संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है. उन्होंने बताया कि GST rationalisation के कारण राज्य को लगभग ₹4,000 करोड़ के राजस्व नुकसान का अनुमान है, जबकि VB-G RAM-G में केंद्र-राज्य हिस्सेदारी के बदले जाने से राज्य पर लगभग ₹4,000 करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय भार आने का आकलन है.
उन्होंने कहा कि MMDR Amendment Act, 2026 के प्रावधान झारखंड के लिए विशेष चिंता का विषय हैं. नए प्रावधानों में राज्य सरकारों द्वारा mineral rights अथवा mineral-bearing lands पर tax, cess या अन्य levy लगाने पर प्रतिबंध का प्रावधान किया गया है, जिसे केंद्र द्वारा निर्धारित शर्तों के अधीन रखा गया है. उन्होंने कहा कि MMDR संशोधन लागू होने की स्थिति में राज्य को लगभग ₹14,000 करोड़ के राजस्व का नुकसान होने की आशंका है. यह नुकसान राज्य की विकास एवं कल्याणकारी योजनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है.
वाणिज्य-कर मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि राज्य स्वकर से झारखण्ड को इस वर्ष राजस्व संग्रहण के लिए निर्धारित 46,000 करोड़ रुपये में से अकेले 24,000 करोड़ रुपये का लक्ष्य वाणिज्य कर विभाग को दिया गया है. अर्थात राज्य को सबसे अधिक वाणिज्य कर विभाग से राजस्व की प्राप्ति होती है. उन्होंने कहा कि विभाग के अधिकारियों को वाहन जैसे आधारभूत संरचना उपलब्ध कराना और मानव संसाधन की कमी को दूर करना उनकी जिम्मेवारी है.
राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि मंत्री के रूप में विभाग के अभिभावक होने के नाते अधिकारियों को संसाधन युक्त बनाना, उनकी जिम्मेवारी है. विभाग के अधिकारियों से भी वो उम्मीद करते हैं कि करों की चोरी की रोकथाम, बकाया राजस्व की वसूली, अवैध खनिज परिवहन से GST को होने वाले नुकसान पर कार्रवाई करें. उन्होंने बैठक में उपस्थित अधिकारियों से यह भी कहा कि दिसंबर माह में प्रदर्शन संतोषजनक नहीं हुआ, तो ऐसे अधिकारियों को चिह्नित कर उनके विरुद्ध विभागीय स्तर पर कार्रवाई की में होने वाली समीक्षात्मक बैठक में जिन अधिकारियों का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं हुआ, तो ऐसे अधिकारियों को चिह्नित कर उनके विरुद्ध विभागीय स्तर पर कार्रवाई की जाएगी.
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