न्यूज़11 भारत
खूंटी/डेस्क: झारखंड के खूंटी से SIR प्रक्रिया को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है. मुंडा आदिवासी समाज के अंतर्गत आने वाले एसी समुदाय ने SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया है. जिला प्रशासन की ओर से समुदाय के लोगों को समझाने का प्रयास किया गया, लेकिन अब तक उन्हें इस प्रक्रिया में शामिल नहीं कराया जा सका है. मामले की गंभीरता को देखते हुए झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार भी खूंटी पहुंचे और संबंधित समुदाय के लोगों के साथ बैठक कर उन्हें SIR प्रक्रिया में शामिल होने के लिए समझाने का प्रयास किया. हालांकि, समुदाय के लोग अभी भी अपनी मांग और रुख पर कायम हैं.
खूंटी में करीब 3 हजार मतदाता, राज्य के 13 जिलों में मौजूदगी
जानकारी के मुताबिक, अकेले खूंटी जिले में इस समुदाय के करीब 3 हजार मतदाता हैं. वहीं, झारखंड के करीब 13 जिलों में इस समुदाय के लोग रहते हैं. समुदाय के लोग अपनी पहचान और परंपराओं को बेहद प्राचीन बताते हैं और सरकारी व्यवस्था को लेकर लंबे समय से अविश्वास जताते रहे हैं. पत्थलगड़ी आंदोलन के दौर में भी इस समुदाय से जुड़े लोगों द्वारा आधार कार्ड और राशन कार्ड जलाए जाने की घटनाएं सामने आई थीं. अब SIR जैसी महत्वपूर्ण चुनावी प्रक्रिया में शामिल होने से इनकार किए जाने के बाद मामला एक बार फिर चर्चा में है.
CEO ने कहा- समझाने की कोशिश जारी, लेकिन समय कम
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार के मुताबिक, BLO और जिला प्रशासन के माध्यम से समुदाय के लोगों को लगातार समझाने का प्रयास किया जा रहा है. हालांकि, अब समय काफी कम बचा है और संबंधित लोगों ने अभी तक अपना एन्यूमरेशन फॉर्म जमा नहीं किया है. निर्वाचन विभाग के मुताबिक, यदि एन्यूमरेशन फॉर्म जमा नहीं किया जाता है तो संबंधित मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल करने में दिक्कत हो सकती है और प्रक्रिया के तहत नाम हटने का खतरा पैदा हो सकता है. इसके बाद सरकारी योजनाओं और अन्य सुविधाओं पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है.
BJP ने बताया गंभीर मामला, खूंटी भेजेगी टीम
प्रदेश BJP अध्यक्ष आदित्य साहू ने पूरे मामले को गंभीर बताया है. उनका कहना है कि पार्टी जल्द ही एक टीम खूंटी भेजेगी और मामले की पूरी जानकारी जुटाएगी. इसके साथ ही राष्ट्रीय चुनाव आयोग को पत्र लिखकर भी इस मुद्दे से अवगत कराने की बात कही गई है. आदित्य साहू ने इसे राज्य सरकार की विफलता से भी जोड़ते हुए कहा कि अगर आदिवासी समाज का ही एक वर्ग सरकार और सरकारी व्यवस्था पर विश्वास नहीं करता है, तो यह बेहद गंभीर चिंता का विषय है.
संथाल में नाम कटने के आरोपों के बीच सामने आया नया मामला
झारखंड में मतदाता सूची को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप पहले से ही जारी हैं. नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी संथाल परगना में बड़ी संख्या में आदिवासी मतदाताओं के नाम काटे जाने का आरोप लगा चुके हैं. ऐसे समय में खूंटी से SIR प्रक्रिया का बहिष्कार किए जाने का यह मामला राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विश्वास बहाल करने की चुनौती
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस समुदाय के लोगों को लोकतांत्रिक और चुनावी प्रक्रिया में दोबारा विश्वास दिलाने के लिए सरकार और निर्वाचन विभाग किस तरह की पहल करते हैं. प्रशासन के सामने एक ओर SIR प्रक्रिया को समय पर पूरा कराने की चुनौती है, तो दूसरी ओर ऐसे समुदायों की आशंकाओं और अविश्वास को दूर करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है.
देखें VIDEO
यह भी पढ़ें- Good News: 177 करोड़ की लागत से बनेगी रांची की पहली स्मार्ट रोड, सर्वे का काम शुरू