राहुल सिंह/न्यूज़11 भारत
रामगढ़/डेस्क: शनिवार को उपायुक्त रामगढ़ ऋतुराज की अध्यक्षता में एल नीनो के संभावित प्रभाव को ध्यान में रखते हुए जिला आकस्मिक फसल योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर बैठक आयोजित की गई. बैठक में कृषि एवं संबद्ध विभागों के पदाधिकारियों, कृषि वैज्ञानिकों, प्रगतिशील किसानों तथा गैर सरकारी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया.
बैठक के दौरान उपायुक्त ने कहा कि संभावित वर्षा की कमी अथवा सूखे की स्थिति से किसानों को होने वाले नुकसान को कम करने के लिए समय रहते प्रभावी रणनीति तैयार करना आवश्यक है. उन्होंने कृषि विभाग को सभी संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर वैकल्पिक फसल व्यवस्था एवं कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने का निर्देश दिया.
बैठक में खरीफ मौसम की मुख्य फसल धान के लिए कम अवधि वाली एवं सूखा-रोधी किस्मों के प्रदर्शन (डेमोंस्ट्रेशन) पर विशेष बल दिया गया. साथ ही जिले में 20 हेक्टेयर क्षेत्र में धान की सीधी बुवाई का प्रदर्शन करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया.
उपायुक्त ने पतरातू, मांडू एवं दुलमी प्रखंडों में मड़ुवा की खेती का प्रदर्शन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया. इसके अलावा किसानों की आय बढ़ाने एवं जोखिम कम करने के उद्देश्य से अंतर कृषि प्रणाली के तहत मक्का, अरहर, उड़द एवं भिंडी जैसी फसलों को अपनाने पर भी बल दिया गया.
बैठक के दौरान जिले में कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से फूड प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना के लिए आवश्यकता अनुसार विस्तृत प्रस्ताव एक सप्ताह के भीतर उपलब्ध कराने का निर्देश संबंधित पदाधिकारियों को दिया गया.
जल संरक्षण के क्षेत्र में गोला प्रखंड स्थित गोमती नदी के उद्गम स्थल से भैरवी नदी तक चेक डैम निर्माण की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई. उपायुक्त ने इस संबंध में आवश्यक तकनीकी एवं प्रशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए.
किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कृषि यंत्र उपकरण बैंक की स्थापना के लिए किसानों की आवश्यकता के अनुरूप यंत्रों का चयन कर सूची उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया.
बैठक में पशुपालन को सुदृढ़ बनाने के लिए साइलेज एवं हे (पशु चारा) निर्माण इकाइयों की स्थापना तथा इस संबंध में कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा किसानों को प्रशिक्षण उपलब्ध कराने पर भी चर्चा हुई. उपायुक्त ने संबंधित विभागों को आवश्यक कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया.
मृदा स्वास्थ्य सुधार के उद्देश्य से सभी प्रखंडों के एटीआईसी सेंटरों में किट के माध्यम से मिट्टी जांच की व्यवस्था स्थापित करने पर भी चर्चा की गई तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए.
उपायुक्त ने कृषि विज्ञान केंद्र, मांडू परिसर में हाईटेक नर्सरी की स्थापना हेतु प्रस्ताव उपलब्ध कराने का निर्देश दिया. साथ ही मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र में बायोफ्लॉक प्रणाली विकसित करने का सुझाव भी दिया.
बैठक के अंत में उपायुक्त ने बंद पड़ी खदानों का उपयोग मत्स्य पालन के लिए किए जाने की संभावनाओं पर बल देते हुए जिला खनन पदाधिकारी एवं जिला मत्स्य पदाधिकारी को उप विकास आयुक्त के मार्गदर्शन में संयुक्त रूप से स्थल निरीक्षण कर विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया.
उपायुक्त ने सभी संबंधित विभागों को समन्वित प्रयासों के साथ जिला आकस्मिक फसल योजना का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने तथा किसानों को समय पर आवश्यक तकनीकी सहायता एवं संसाधन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, ताकि एल नीनो के संभावित प्रभावों का सफलतापूर्वक सामना किया जा सके.