न्यूज11 भारत
रांची/डेस्कः- बिहार चुनाव में महागठबंधन को करारी हार का सामना करना पड़ा है. हार को लेकर कांग्रेस आलाकमान ने अपना मंथन शुरु कर दिया है. सुत्रों के अनुसार सीट बंटवारे को लेकर तेजस्वी यादव पर जमकर निशाना साधा जा रहा है, तेजस्वी के मनमानी का खामियाजा चुनाव में भुगतना पड़ा है. .
9 सीटों पर फ्रेंडली मुकाबला
कांग्रेस को कुल 61 सीट दी गई थी जिसमें से 9 सीटों पर फ्रेंडली लड़ाई हुई थी. 23 सीट तो ऐसी थी जहां पिछले कई चुनाव से न तो कभी कांग्रेस जीती थी और न ही आरडेजी. दोखा जाएतो कांग्रेस को सिर्फ 14 सीटें ऐसी मिली थी जहां वो जीत सकते थे. उसमें से उन्होने 6 पर जीत हासिल की.
राजद के कारण ओवैसी और जेडीयू को हुआ फायदा
कहा जा रहा है कि महागठबंधन में सीएम व डिप्टी सीएम को लेकर काफी खींचतान हुआ. तेजस्वी को सीएम घोषित करने के बाद मुकेश साहनी की भी डिप्टी सीएम वाली डिमांड को पूरी करनी पड़ी. इसपर मुसलमानो पर एक नाकारात्मक असर भी पड़ा. इसी का फायदा ओवैसी व जेडीयू को मिला. इससे दलित व स्वर्ण मतदाताओं को भी नुकसान उठाना पड़ा.
नीतिश के सामने फीके पड़ गए तेजस्वी
नीतिश के चेहरे के सामने तेजस्वी टिक नहीं पाए, सूत्रों के हवाले से इसी का खामियाजा पूरी महागठबंधन को उठाना पड़ा. पिछले 5 साल तक तेजस्वी प्रचार-प्रसार से दूर रहे और अंत में की गई घोषनाओं का कोई लाभ नहीं मिला. आखिरी के दिनों में रोज 25-25 रैलियां कर सिर्फ अपने उम्मीदवारों के जिताने के बारे में बात कही. रोजगार पलायन, लाभार्थी पर कभी जनता को समझाते नहीं दिखे.
जीविका दीदियों ने दिया वोट
बीजेपी के तरफ से बिहारियों को अपने पैसे से टिकट कटवा कर बिहार वोट करने के लिए भोजा जो कि एक अच्छी खासी संख्या में थी. चुनाव के समय महिलाओं के खाते में 10-10 हजार रुपए डाले गए. वोट चोरी का मुद्दा भी काम नहीं आया.
दिल्ली में वोट में गड़बड़ी को लेकर भव्य रैली का आयोजन
शुरुआती समीक्षा के बाद कांग्रेस अब बिहार चुनाव में वोट चोरी व एसआईआर में गड़बड़ी के आंकड़े को जुटा कर जनता के समक्ष रखेगी. दिसंबर के शुरुआत में दिल्ली के रामलीला मैदान में इसी मुद्दे को लेकर एक भव्य रैली का आयोजन किया जाएगा. जिसमें इंडिया ब्लॉक के सभी दलों को बुलाया जाएगा.
ये भी पढ़ेंः-क्या हार का जवाब देने से बच रहे हैं पीके? क्यों कैंसल कर दी प्रेस कांफ्रेंस..