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रांची/डेस्क: राज्य के सरकारी एवं निजी मेडिकल, डेंटल और आयुष महाविद्यालयों में फर्जी प्रमाण-पत्रों के आधार पर नामांकन की संभावना को समाप्त करने के लिए झारखंड सरकार ने कड़ा कदम उठाया है. स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग ने नीट-यूजी/पीजी के तहत होने वाले नामांकनों के लिए विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया लागू की है. यह व्यवस्था विभागीय संकल्प ज्ञापांक 472(9) के तहत प्रभावी की गई है.
नई एसओपी के तहत अभ्यर्थियों के स्थानीय निवास, जाति, आय और दिव्यांगता प्रमाण-पत्रों का ऑनलाइन एवं भौतिक सत्यापन किया जाएगा. सरकार ने स्पष्ट किया है कि फर्जी या गलत प्रमाण-पत्र के आधार पर नामांकन की किसी भी कोशिश को गंभीरता से लिया जाएगा. नामांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता और प्रमाण-पत्रों के सत्यापन के लिए झारखंड संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद के स्तर पर उच्चस्तरीय समितियों का गठन किया गया है.
एमबीबीएस/एमडी/एमएस पाठ्यक्रम के लिए समिति में शामिल होंगे
1. नामांकन प्रभारी, रिम्स रांची — सदस्य
2. नामांकन प्रभारी, सभी सरकारी मेडिकल कॉलेज — सदस्य
3. प्रतिनिधि, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग, झारखंड — सदस्य
4. विशेष कार्य पदाधिकारी , JCECEB — सदस्य सचिव
बीडीएस/एमडीएस पाठ्यक्रम के लिए समिति में शामिल होंगे
1. नामांकन प्रभारी, रिम्स रांची — सदस्य
2. नामांकन प्रभारी, सभी सरकारी डेंटल कॉलेज — सदस्य
3. विशेष कार्य पदाधिकारी, JCECEB — सदस्य सचिव
आयुष/बी.एच.एम.एस. पाठ्यक्रमों के लिए समिति में शामिल होंगे
1. नामांकन प्रभारी, सभी सरकारी आयुष कॉलेज — सदस्य
2. विशेष कार्य पदाधिकारी, JCECEB — सदस्य सचिव
राज्य स्तरीय जांच के साथ-साथ रिम्स रांची तथा राज्य के प्रत्येक संबंधित मेडिकल कॉलेज में अभ्यर्थियों के मूल प्रमाण-पत्रों की पुनः जांच के लिए संस्थान स्तर पर समिति गठित की गई है.
इस समिति में
1. निदेशक/प्राचार्य/डीन — अध्यक्ष
2. अधीक्षक — सदस्य
3. नामांकन प्रभारी — सदस्य सचिव
एसओपी के अनुसार अभ्यर्थियों के जाति, आय, स्थानीय निवास और दिव्यांगता प्रमाण-पत्रों का सत्यापन झारखंड सरकार के संबंधित ऑनलाइन पोर्टल से किया जाएगा. ऑनलाइन सत्यापन में किसी प्रमाण-पत्र के संदिग्ध पाए जाने पर आगे की जांच की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. संदिग्ध प्रमाण-पत्रों को संबंधित जिले के उपायुक्त को भेजा जाएगा. जिला प्रशासन को ऐसे प्रमाण-पत्रों का भौतिक सत्यापन कर 10 कार्य दिवसों के भीतर जांच रिपोर्ट संबंधित प्राधिकारी को उपलब्ध करानी होगी.
सत्यापन रिपोर्ट प्राप्त होने तक अभ्यर्थी को केवल औपबंधिक नामांकन दिया जाएगा. अंतिम नामांकन प्रमाण-पत्रों के सत्यापन के बाद ही सुनिश्चित किया जाएगा. सरकार ने एसओपी में स्पष्ट किया है कि यदि किसी अभ्यर्थी के प्रमाण-पत्र जांच में फर्जी पाए जाते हैं, तो संबंधित कॉलेज के प्राचार्य द्वारा उसका नामांकन तत्काल रद्द किया जाएगा. साथ ही अभ्यर्थी के विरुद्ध FIR दर्ज कराकर विधिसम्मत कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
नामांकन के दौरान जमा किए गए अभ्यर्थियों के सभी डिजिटल एवं भौतिक अभिलेख सुरक्षित रखे जाएंगे. इससे आवश्यकता पड़ने पर किसी भी अभ्यर्थी के प्रमाण-पत्रों की दोबारा जांच की जा सकेगी. विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह एसओपी रिम्स रांची सहित राज्य के सभी सरकारी एवं निजी मेडिकल, डेंटल, होम्योपैथिक, आयुर्वेदिक और यूनानी महाविद्यालयों में तत्काल प्रभाव से लागू होगी. सरकार के इस निर्णय से नीट नामांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ने और फर्जी प्रमाण-पत्रों के आधार पर प्रवेश लेने की कोशिशों पर प्रभावी रोक लगने की उम्मीद है.