बयान पर प्रतिक्रिया

टेंडर रद्द कर राजस्व बढ़ाने का दावा, लेकिन पुराने कार्यों की गुणवत्ता पर भी दें जवाब - 20 सूत्री अध्यक्ष रंजन कुमार दुबे

कार्यकाल में कराए गए कार्यों की गुणवत्ता पर भी जनता के सवालों का जवाब देना चाहिए - दुबे

By : Pramod Kumar , News11 Bharat
टेंडर रद्द कर राजस्व बढ़ाने का दावा, लेकिन पुराने कार्यों की गुणवत्ता पर भी दें जवाब - 20 सूत्री अध्यक्ष रंजन कुमार दुबे

संतोष श्रीवास्तव/न्यूज़ 11भारत

पलामू/डेस्क: मेदिनीनगर नगर निगम की महापौर अरुणा शंकर द्वारा टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और निगम का राजस्व बढ़ाने संबंधी दिए गए बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए 20 सूत्री अध्यक्ष, प्रखंड चैनपुर रंजन कुमार दुबे ने कहा कि यदि वास्तव में पारदर्शिता और जनहित महापौर की सर्वोच्च प्राथमिकता है, तो उनके कार्यकाल में कराए गए कार्यों की गुणवत्ता पर भी जनता के सवालों का जवाब देना चाहिए.

रंजन कुमार दुबे ने कहा कि महापौर महोदया बताएं कि चैनपुर पंचायत भवन के पीछे करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित पार्क की वर्तमान स्थिति क्या है? यदि निर्माण कार्य पूरी गुणवत्ता और निर्धारित मानकों के अनुरूप कराया गया था, तो आज उसकी गुणवत्ता पर लगातार सवाल क्यों उठ रहे हैं? इसी प्रकार मुख्य सड़क के किनारे लगाई गई स्ट्रीट लाइटों और बिजली के पोलों की हालत भी कुछ ही समय में खराब क्यों हो गई? कई स्थानों पर लाइटें बंद हैं, जबकि कई जगह बिजली के पोल टेढ़े हो चुके हैं. आखिर इसके लिए जिम्मेदार कौन है?

उन्होंने कहा कि महापौर अपने बयान में राजस्व वृद्धि और पारदर्शिता की बात कर रही हैं, लेकिन जनता यह भी जानना चाहती है कि उनके कार्यकाल में जिन कार्यों को स्वीकृति दी गई, उनकी गुणवत्ता की निगरानी किस स्तर पर हुई. यदि किसी निर्माण कार्य में कमी पाई गई है, तो संबंधित संवेदकों के विरुद्ध अब तक क्या कार्रवाई की गई?

रंजन कुमार दुबे ने कहा कि नगर में लंबे समय से कुछ संवेदकों को विशेष प्राथमिकता मिलने की चर्चाएं होती रही हैं. यदि ऐसे आरोप पूरी तरह निराधार हैं, तो महापौर स्वयं आगे आकर सभी तथ्यों को सार्वजनिक करें और स्पष्ट करें कि सभी टेंडर एवं कार्य पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और नियमों के अनुरूप हुए हैं. यदि कहीं भी अनियमितता हुई है, तो उसकी निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए.

उन्होंने कहा कि केवल नए टेंडर रद्द करने या निगम का राजस्व बढ़ाने का दावा कर देने से पारदर्शिता सिद्ध नहीं होती. पारदर्शिता का वास्तविक अर्थ यह है कि पहले कराए गए कार्यों की गुणवत्ता, जनता के पैसे का सही उपयोग और दोषियों की जवाबदेही भी सुनिश्चित हो. जनता जानना चाहती है कि जिन कार्यों पर करोड़ों रुपये खर्च हुए, उनकी स्थिति आज बदहाल क्यों है.

20 सूत्री अध्यक्ष, प्रखंड चैनपुर रंजन कुमार दुबे ने महापौर से मांग की कि यदि वे वास्तव में पारदर्शिता की पक्षधर हैं, तो पुराने निर्माण कार्यों की भी तकनीकी जांच कराई जाए, गुणवत्ता रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए और जहां कहीं भी लापरवाही या अनियमितता सामने आए, वहां संबंधित अधिकारियों एवं संवेदकों के विरुद्ध निष्पक्ष कार्रवाई की जाए. जनता को केवल दावे नहीं, बल्कि जवाब और परिणाम चाहिए.

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