फर्जी नोटरी मोहर

चांडिल कोर्ट में फर्जी नोटरी मोहर का मामला, वरिष्ठ अधिवक्ता की शिकायत पर पुलिस ने शुरू की जांच

नकली मोहर और फर्जी हस्ताक्षर से दस्तावेज तैयार करने का आरोप, कोर्ट परिसर में मचा हड़कंप

By : Ark Sahuliyar
चांडिल कोर्ट में फर्जी नोटरी मोहर का मामला, वरिष्ठ अधिवक्ता की शिकायत पर पुलिस ने शुरू की जांच

न्यूज़11 भारत 
रांची/डेस्क:
सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल अनुमंडल न्यायालय परिसर में नोटरी पब्लिक की कथित फर्जी मोहर का इस्तेमाल कर दस्तावेज तैयार किए जाने का मामला सामने आया है. शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है. शनिवार (1 अगस्त) को चांडिल थाना के एएसआई सुरेन्द्र कुमार न्यायालय परिसर पहुंचे और मामले से जुड़े अधिवक्ताओं एवं बार कर्मियों से जानकारी जुटाई. यह कार्रवाई वरिष्ठ अधिवक्ता एवं भारत सरकार द्वारा नियुक्त नोटरी पब्लिक अशोक कुमार झा की लिखित शिकायत के आधार पर की जा रही है. उन्होंने 30 जुलाई को अनुमंडल पदाधिकारी (SDO), चांडिल को आवेदन देकर पूरे मामले की जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी.

सोशल मीडिया पर वायरल दस्तावेज से हुआ खुलासा
अशोक कुमार झा के अनुसार, 29 जुलाई को उन्हें सूचना मिली कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने उनकी नोटरी पब्लिक की नकली मोहर तैयार कर ली है और उसका इस्तेमाल एकरारनामा, शपथ पत्र समेत अन्य दस्तावेजों पर किया जा रहा है. उन्होंने दावा किया कि फर्जी मोहर उनकी मूल मोहर से पूरी तरह अलग है. उन्होंने यह भी बताया कि सोशल मीडिया पर प्रसारित एक कथित एकरारनामा में उनकी नकली मोहर का उपयोग किया गया है, जबकि उस दस्तावेज पर उनके वास्तविक हस्ताक्षर मौजूद नहीं हैं. इससे उन्हें फर्जीवाड़े की आशंका हुई, जिसके बाद उन्होंने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की.

पुलिस जुटा रही साक्ष्य, कई पहलुओं की हो रही जांच
शिकायत के साथ अधिवक्ता ने अपनी असली नोटरी मोहर का नमूना और कथित फर्जी दस्तावेज की प्रति भी प्रशासन को उपलब्ध कराई है. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि नकली मोहर किसने तैयार की, इसका इस्तेमाल किन-किन दस्तावेजों में किया गया और इस पूरे नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं. सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान पुलिस ने बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों और अन्य अधिवक्ताओं से भी पूछताछ की. मामले से जुड़े दस्तावेज और कथित फर्जी मोहर की तस्वीरों को साक्ष्य के तौर पर सुरक्षित रखा गया है.

अधिवक्ताओं ने जताई चिंता, सख्त कार्रवाई की मांग
घटना के सामने आने के बाद अधिवक्ताओं में नाराजगी देखी जा रही है. उनका कहना है कि यदि नोटरी की फर्जी मोहर के जरिए दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं तो यह न केवल आम लोगों के साथ धोखाधड़ी है, बल्कि न्यायिक व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है. फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है. जांच पूरी होने के बाद दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी. अशोक कुमार झा चांडिल व्यवहार न्यायालय में वरिष्ठ अधिवक्ता होने के साथ-साथ भारत सरकार द्वारा अधिकृत नोटरी पब्लिक भी हैं.

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