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गुमला/डेस्क: गुमला जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय में कार्यरत क्लर्क रंजीत कुजूर तथा सेवानिवृत्त शिक्षक वत्स रविकांत को विगत 14 जुलाई को एंटी करप्शन ब्यूरो , रांची के द्वारा अल्पसंख्यक विद्यालय के एक शिक्षक से एरियर बिल भुगतान करने के एवज में घुस लेने के मामले में गिरफ्तार किया है. अब इस रिश्वत प्रकरण में संबंधित अन्य अधिकारियों तथा कर्मचारियों के खिलाफ भी भाजपा के जिला अध्यक्ष ने उच्च स्तरीय कमेटी से जाँच कराने की माँग है , तो वहीं सत्तारूढ़ दल के सहयोगी पार्टी कॉन्ग्रेस के नेता सह पूर्व शिक्षा मंत्री बंधु तिर्की ने इस प्रकरण में शामिल संबंधित अधिकारियों को सचेत रहने की चेतावनी दी है .
क्या है पूरा प्रकरण आपको विस्तार से बताते हैं. दरअसल गुमला जिला में स्थित अल्पसंख्यक विद्यालयों के लगभग दो सौ शिक्षकों की नियुक्ति के लंबे समय बाद अभी लगभग 18 करोड़ रुपए शिक्षक - शिक्षिकाओं को एरियर बिल भुगतान किया जा रहा है. इसी एरियल बिल भुगतान के एवज में एक शिक्षक से एक लाख रुपए की घुस की माँग की गई थी , जिसपर उक्त शिक्षक ने ₹ 50 हजार देने की सहमती जताई थी लेकिन इसकी शिकायत एसीबी राँची में कर दिया था . एसीबी में मामला पहुंचने के मामले की छानबीन की गई फिर विगत 14 जुलाई को जाल बुनकर जब जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय में कार्यरत क्लर्क रंजीत कुजूर तथा सेवानिवृत्त शिक्षक वत्स रविकांत घुस ले रहे थे तब उन्हें एसीबी की टीम ने गिरफ़्तार कर लिया था.
एसीबी राँची के द्वारा गुमला जिला शिक्षा विभाग में की गई कार्रवाई अब तुल पकड़ रहा है. इस मामले पर भाजपा के जिला अध्यक्ष सागर उरांव ने कहा की गुमला शिक्षा विभाग में एसीबी की कार्रवाई यह दर्शाती है कि गुमला में भ्रष्टाचार चरम पर है . उन्होंने यह भी कहा कि इस पूरे प्रकरण में सिर्फ छोटे कर्मी ही फंसे हैं , जबकि यदि इस मामले पर उच्च स्तरीय कमेटी जाँच करे तो इसमें और भी कई अन्य अधिकारी और कर्मचारी फसेंगे. ऐसे में जिला भाजपा यह मांग करती है कि एरियर बिल भुगतान मामले की जाँच एक उच्च स्तरीय कमेटी से कराई जाए.
वहीं सत्तारूढ़ दल के सहयोगी पार्टी के नेता सह पूर्व शिक्षा मंत्री बंधु तिर्की ने कहा कि गुमला जिला में अल्पसंख्यक विद्यालय के शिक्षक शिक्षिकाओं पर बहुत ही नाइंसाफी हो रही है ,जिस तरह से उनसे व्यवहार किया जा रहा है यह चिंता का विषय है. उन्होंने बताया कि अल्पसंख्यक विद्यालयों के शिक्षकों का अनुमोदन , फिक्सेशन आदि मामलों के चलते विलंब से एक मुश्त राशि मिलती है जिसमें एक-एक शिक्षकों का एरियल बिल लाखों रुपए में हो जाती है . उन्होंने उदाहरण देते हुए यह भी कहा कि अगर किसी एक शिक्षक का बिल 25 लाख रुपए का है तो उनसे आधा राशि घुस के रूप में मांग की जाती है. उन्होंने कहा की शिक्षा विभाग के अधिकारी, ट्रेजरी अधिकारी और उच्च अधिकारी सतर्क रहे अन्यथा उन पर भी कार्रवाई की जाएगी.
वहीं इस मामले पर जिला शिक्षा अधीक्षक नूर आलम खान ने बताया कि अल्पसंख्यक विद्यालय से लगभग 200 शिक्षकों का करीब 35 करोड रुपए का एरिया भुगतान किया जाना है. उन्होंने बताया कि विभाग ने 11 जून को 18 करोड रुपए एरियर भुगतान के लिए उपलब्ध कराया था . उन्होंने बताया कि प्राप्त राशि को दो अलग - अलग बिल जिसमें पहला बिल 10 करोड़ रुपये की राशि थी उसे 15 जून को ट्रेजरी ऑफिस भेजा गया था जिसे 25 जून को ट्रेज़री ऑफिस में पास किया गया, वहीं दूसरा बिल 24 जून को भेजा गया जिसे भी विलंब से पास किया गया .
ट्रेजरी अधिकारी ने क्या कहा
जब हमने इस मामले पर ट्रेजरी ऑफिस के अधिकारी से संबंधित एरियर बिल भुगतान के संबंध हुए विलंब का कारण जानना चाहा तो उन्होंने कहा कि बिल आने के बाद उसकी जांच की गई फिर उसे पास कर दिया गया . हालांकि ट्रेज़री ऑफिस के अधिकारी ने 15 जून का पहला बिल का कोई जानकारी नहीं दिए , वहीं 24 जून को भेजे गए दूसरे बिल को उन्होंने 29 जून को रिसीव कर 8 जून को बिल पास किए जाने बात कही. जबकि सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ट्रेजरी में बिल 3 दिन के अंदर बिल को पास करना है. परंतु इतने दिनों तक ट्रेजरी में बिल को रोका जाना कहीं ना कहीं संदेह के घेरे में आता है.
बहरहाल इस पूरे प्रकरण में जिला शिक्षा अधीक्षक तथा ट्रेज़री ऑफिस के अधिकारी का बयान अलग अलग आ रहे हैं . तो वहीं चर्चा है की ट्रेजरी ऑफिस में अल्पसंख्यक विद्यालय का बिल भुगतान में काफी विलंब की गई है. वही बिल का भुगतान तब की गई जब जिला के एक वरीय अधिकारी ने हस्तक्षेप किया था. वहीं पूर्व शिक्षा मंत्री बंधु तिर्की का यह आरोप कि अल्पसंख्यक विद्यालय शिक्षकों से एरियर बिल का 50% तक की राशि घुस में ली जा रही है , यह एक बहुत ही गंभीर है . अब ऐसे में अगर राज्य सरकार इस मामले पर निष्पक्ष जांच कराती है तो निश्चित रूप से इसमें कई अन्य अधिकारी भी घेरे में आ सकते हैं.
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