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बुढ़मू/डेस्क: बुढ़मू, प्रखंड सभागार में शुक्रवार को दहेज निषेध को लेकर एक विचार-विमर्श बैठक का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रमुख सत्यनारायण मुंडा ने की और संचालन प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी नील कुमार ने किया. बैठक में दहेज प्रथा के उन्मूलन हेतु जिला, प्रखंड व पंचायत स्तर पर समन्वित कार्यवाही और टोला-टोला जागरूकता अभियान चलाने पर जोर दिया गया.
प्रमुख सत्यनारायण मुंडा ने अपने संबोधन में कहा कि दहेज लेना और देना दोनों ही अपराध हैं. उन्होंने बताया कि इस प्रथा को समाप्त करने के लिए जिला स्तर पर डीसी व एसडीओ, प्रखंड स्तर पर बीडीओ, सीओ, बीईईओ तथा पंचायत स्तर पर पंचायत सेवक स्थानीय ग्रामीण समुदाय के सहयोग से मिलकर काम करेंगे. मुंडा ने समाज में सतत जागरण और कानून के कठोर अनुपालन की आवश्यकता पर भी बल दिया.
उपप्रमुख हरदेव साहू ने कहा कि दहेज देने के बजाय बेटियों को बेहतर शिक्षा दी जानी चाहिए ताकि वे अपना भविष्य स्वावलंबी और उज्जवल बना सकें. उन्होंने परिवारों से अपील की कि वे बेटियों की पढ़ाई-लिखाई पर निवेश करें ताकि समाज में समानता व आत्म निर्भरता बढ़े.
मुखिया अनूपा उरांव ने कहा कि परम्परागत रूप से हमारे समाज में दहेज प्रथा नहीं रही, पर आधुनिकता के चलते कुछ लोग इसे अपनाने लगे हैं. उन्होंने कहा कि यह समाज की सांस्कृतिक पहचान के विरुद्ध है और इस कुप्रथा को समाप्त करने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है.
बैठक में उपस्थित अन्य अधिकारियों और ग्रामीण प्रतिनिधियों ने भी दहेज विरोधी जागरूकता कार्यक्रमों, घरेलू स्तर पर काउंसलिंग और कानूनी सहायता प्रदान करने जैसी पहलों पर चर्चा की. अगले चरण में टोला-टोला जाकर चौपाल, पंचायत स्तर पर बैठकें और विद्यालयों में संवाद कार्यक्रम आयोजित करने का प्रस्ताव रखा गया.
कार्यक्रम में प्रखंड के विभिन्न पंचायतों के प्रतिनिधि, महिला समाज सेवक और युवाओं सहित बड़ी संख्या में लोग शामिल रहे. बैठक में दहेज विरोधी संदेशों के प्रसार और उल्लंघन की स्थिति में त्वरित शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करने पर भी सहमति बनी.
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