झारखंड में कलम पर हमला बर्दाश्त नहीं, हजारीबाग की घटना ने खड़े कर दिए बड़े सवाल,...

झारखंड में कलम पर हमला बर्दाश्त नहीं, हजारीबाग की घटना ने खड़े कर दिए बड़े सवाल, क्या सवाल पूछना भी गुनाह हो गया है?

झारखंड में कलम पर हमला बर्दाश्त नहीं हजारीबाग की घटना ने खड़े कर दिए बड़े सवाल क्या सवाल पूछना भी गुनाह हो गया है

संतोष कुमार/न्यूज़11 भारत

सरायकेला/डेस्क: पिछले दिनों  हजारीबाग में पत्रकारों के साथ हुई मारपीट की घटना ने पूरे राज्य में आक्रोश की लहर पैदा कर दी है. इस मामले को लेकर द प्रेस क्लब, सरायकेला-खरसावां के महासचिव प्रमोद सिंह के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की है. 

महासचिव प्रमोद सिंह ने इस घटना को लोकतंत्र पर सीधा हमला बताते हुए कहा कि यह सिर्फ पत्रकारों पर हमला नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रहार है. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पत्रकार का धर्म सवाल पूछना है और जनता के वोट से चुने गए प्रतिनिधियों का कर्तव्य उन सवालों का जवाब देना.

उन्होंने राज्य के मंत्री इरफान अंसारी पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके समर्थकों द्वारा की गई यह हरकत बेहद निंदनीय है और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है. प्रमोद सिंह ने मांग की कि मंत्री स्वयं आगे आकर इस घटना के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगें और दोषी समर्थकों को तुरंत पुलिस के हवाले करें.

प्रमोद सिंह ने कहा अगर आज पत्रकारों की आवाज़ दबाई गई, तो कल आम जनता की आवाज़ भी सुरक्षित नहीं रहेगी.  हम चुप बैठने वालों में से नहीं हैं. न्याय के लिए हर स्तर पर लड़ाई लड़ी जाएगी. 

प्रेस क्लब ऑफ़ सरायकेला-खरसावां ने इस घटना की घोर निंदा करते हुए स्पष्ट किया है कि पत्रकारों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा. संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा. 

  • हम कलम के सिपाही हैं, डरने वाले नहीं.
  • जो लोग सच से डरते हैं, वही पत्रकारों पर हमला करते हैं.
  • हम मांग करते हैं  दोषियों की तुरंत गिरफ्तारी हो.
  • और मंत्री जी अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करें. 

हजारीबाग की इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि झारखंड में पत्रकारों की सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है. अब देखना होगा कि सरकार इस मामले में कितनी गंभीरता दिखाती है. क्योंकि सवाल सिर्फ पत्रकारों का नहीं, लोकतंत्र के अस्तित्व का है.

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