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आदित्यपुर/डेस्क: सरायकेला जिले के आदित्यपुर नगर निगम के वार्ड 17 स्थित सेंट्रल पब्लिक स्कूल मतदान केंद्र पर प्रशासनिक गड़बड़ी को उजागर करने पहुंचे स्थानीय पत्रकार को कथित रूप से प्रत्याशी बॉबी सिंह और उनके समर्थकों के आक्रोश का सामना करना पड़ा. आरोप है कि बॉबी सिंह दो दर्जन से अधिक महिला-पुरुष समर्थकों के साथ मतदान केंद्र के भीतर प्रवेश कर गए और पत्रकार को एक खास प्रत्याशी का प्रचारक बताकर सोशल मीडिया पर ट्रोल करना शुरू कर दिया. इस दौरान अमर्यादित भाषा के प्रयोग की भी बात सामने आई है. मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रित किया. जबकि मतदान केंद्र और उसकी सौ मीटर परिधि में निषेधाज्ञा लागू थी. पत्रकार के पास समाचार संकलन का वैध प्रमाण पत्र भी मौजूद था.
जानकारी के अनुसार वार्ड 17 के लिए सेंट्रल पब्लिक स्कूल परिसर में पांच बूथ बनाए गए थे. बूथ संख्या 124 पर बीएलओ के रूप में सत्यम भारद्वाज की नियुक्ति की गई थी, जो नगर निगम का संविदा कर्मी होने के साथ इसी वार्ड का निवासी भी है. मतदाता पर्ची लेकर मतदान केंद्र में प्रवेश कर रहे थे, लेकिन उपलब्ध मतदाता सूची से पर्चियों का मिलान नहीं हो पा रहा था. सूची और पर्ची में अंतर के कारण कई मतदाताओं को वापस लौटना पड़ा. मतदाताओं ने बीएलओ से शिकायत की, लेकिन आरोप है कि चुनाव प्रचार के दौरान उन्हें एक खास प्रत्याशी के साथ देखा गया था, जिससे कुछ मतदाता असहज थे. शिकायत सामने आने पर उपायुक्त ने तत्काल प्रभाव से बीएलओ को बूथ से हटाने का निर्देश दिया. आरोप है कि हटाए जाने के बाद वे मतदाता सूची अपने साथ लेकर चले गए और करीब डेढ़ घंटे तक उपलब्ध नहीं रहे. इस दौरान मतदान प्रक्रिया बाधित रही और मतदाता भटकते नजर आए. स्थिति तब और बिगड़ी जब उनके स्थान पर भेजे गए बीएलओ सुपरवाइजर की बूथ कर्मियों से नोंकझोंक हो गई. बाद में वरीय अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद दूसरे बूथ से बीएलओ और मतदाता सूची मंगाई गई, तब जाकर मतदान दोबारा सुचारु रूप से प्रारंभ हो सका.
आरोप है कि बीएलओ को हटाए जाने के बाद मतदान केंद्र के बाहर यह प्रचारित किया गया कि पत्रकार मतदाताओं को प्रभावित कर रहा है और खास प्रत्याशी के पक्ष में कार्य कर रहा है. इसी आधार पर बॉबी सिंह कथित रूप से समर्थकों के साथ केंद्र के भीतर पहुंचे और हंगामा करने लगे. पुलिस बल ने सभी को बाहर निकालकर स्थिति सामान्य की. सूचना पर पहुंचे अनुमंडल पदाधिकारी अभिनव कुमार ने मामले की जांच की और मतदान केंद्र के समीप हंगामा न करने की चेतावनी दी. अन्य प्रत्याशी भी मौके पर पहुंचे, लेकिन स्थिति को देखते हुए वापस लौट गए. पत्रकार पक्ष का कहना है कि उन्होंने संभावित गड़बड़ी को उजागर कर अपना दायित्व निभाया है. यदि किसी भी प्रकार से यह सिद्ध हो जाए कि उन्होंने मतदान को प्रभावित करने का प्रयास किया, तो नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है. वहीं सवाल यह भी उठ रहा है कि निषेधाज्ञा लागू स्थल के भीतर प्रवेश कर किसी पत्रकार के साथ दुर्व्यवहार करना क्या आदर्श आचार संहिता और मीडिया की स्वतंत्रता का उल्लंघन नहीं है. घटना ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और प्रेस की स्वतंत्रता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं.
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