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रांची/डेस्क: जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है. गुरुवार को छात्रों ने अपनी प्रमुख मांगों का विस्तृत मांगपत्र जारी किया. इसमें 14वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा, 2023 और 2025 बैकलॉग परीक्षाओं को रद्द करने, टीडीपीएल एजेंसी की भूमिका की सीबीआई और ईडी से जांच कराने, परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और अभ्यर्थियों को अधिक पारदर्शी व्यवस्था देने की मांग की गई है. छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन और उग्र होगा.
सीबीआई और ईडी जांच की मांग
छात्रों की पहली मांग है कि 14वीं जेपीएससी, वर्ष 2023 और 2025 की बैकलॉग परीक्षाओं को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए. साथ ही टीडीपीएल एजेंसी द्वारा पूर्व में आयोजित सभी परीक्षाओं को भी निरस्त कर सीबीआई और ईडी से जांच कराई जाए. छात्रों ने फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से 90 दिनों के भीतर जांच पूरी करने की मांग की है. मांगपत्र में टीडीपीएल के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी की कथित संलिप्तता की जांच की भी मांग की गई है. इसके अलावा जेपीएससी और जेएसएससी में शीर्ष से लेकर निचले स्तर तक अधिकारियों के स्थानांतरण, अलग-अलग परीक्षाओं के लिए अलग एजेंसी चयन, परीक्षा कैलेंडर जारी करने और समय पर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने की भी मांग उठाई गई है.
मुख्यमंत्री से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की भी मांग
छात्रों ने 14वीं जेपीएससी की अधियाचना वापस लेकर 14वीं और 15वीं जेपीएससी का संयुक्त विज्ञापन जारी करने, अधिकतम आयु सीमा 1 अगस्त 2018 के अनुसार तय करने, ओएमआर शीट में "Not Attempted" का विकल्प देने, उत्तर पुस्तिकाओं की मैनुअल जांच कर उसकी डिजिटल कॉपी अभ्यर्थियों के OTR आईडी पर अपलोड करने और परिणाम के साथ कटऑफ व स्कोर कार्ड सात दिनों के भीतर उपलब्ध कराने की मांग भी रखी है.इसके साथ ही छात्रों ने सभी जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में सामान्य वर्ग के लिए अधिकतम आयु सीमा 42 वर्ष करने तथा अन्य वर्गों को नियमानुसार छूट देने की मांग की है.
मांगपत्र के अंत में छात्रों ने कहा है कि उनकी सभी मांगें बाध्यकारी हैं और यदि इन्हें पूरा नहीं किया गया तो राज्य सरकार इसकी जिम्मेदार होगी. साथ ही मुख्यमंत्री से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की भी मांग की गई है. जेपीएससी और जेएसएससी को लेकर छात्रों का आंदोलन अब केवल परीक्षा रद्द करने तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुधार की मांग भी प्रमुख मुद्दा बन चुकी है. अब देखना होगा कि सरकार और आयोग छात्रों की इन मांगों पर क्या फैसला लेते हैं.
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