बारिश का असर

आदर्शनगर मुक्ति धाम बदहाल, मिट्टी कटाव से दाहसंस्कार मुश्किल; निजी खर्च से करायी गयी भरावट

अंतिम संस्कार के लिए पहुंचने वाले मृतक के परिजनों और स्थानीय लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था

By : Pramod Kumar , News11 Bharat
आदर्शनगर मुक्ति धाम बदहाल, मिट्टी कटाव से दाहसंस्कार मुश्किल; निजी खर्च से करायी गयी भरावट

प्रमोद कुमार/न्यूज़11 भारत

बरवाडीह/डेस्क: आदर्शनगर स्थित मुक्ति धाम में कुछ दिनों पूर्व हुई तेज बारिश के बाद स्थिति बेहद खराब हो गई थी. लगातार बारिश के कारण दाहसंस्कार स्थल पर मिट्टी का कटाव हो जाने से जमीन कई जगह धंस गई थी. इसके कारण दाहसंस्कार के लिए पर्याप्त जगह नहीं बची थी और लोगों को शव का अंतिम संस्कार करने में भी परेशानी हो रही थी. स्थिति ऐसी हो गई थी कि दाहसंस्कार स्थल पर विधिवत अंतिम संस्कार कर पाना मुश्किल हो गया था.

बारिश के बाद मुक्ति धाम परिसर में जगह-जगह जलजमाव और कीचड़ की स्थिति बनी हुई थी. वहीं, दाहसंस्कार स्थल के आसपास मिट्टी का कटाव होने से जमीन असमतल हो गई थी. इससे अंतिम संस्कार के लिए पहुंचने वाले मृतक के परिजनों और स्थानीय लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था.

समस्या की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय तीन लोगों ने मानवता और सामाजिक जिम्मेदारी का परिचय देते हुए अपने निजी खर्च से मिट्टी की व्यवस्था कराकर दाहसंस्कार स्थल का भरावट कराया. इससे दाहसंस्कार स्थल को दोबारा उपयोग के लायक बनाने में मदद मिली. हालांकि, इन तीनों लोगों ने अपना नाम सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया. उनका कहना है कि उन्होंने यह कार्य किसी प्रचार या श्रेय के लिए नहीं, बल्कि लोगों की परेशानी को देखते हुए कराया है.

 प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर उठे सवाल 

मुक्ति धाम जैसी महत्वपूर्ण जगह पर दाहसंस्कार स्थल का बारिश में मिट्टी कटाव के कारण खराब हो जाना व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि श्मशान घाट में बुनियादी सुविधाओं के साथ-साथ दाहसंस्कार स्थल को सुरक्षित और व्यवस्थित रखना प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है.

लोगों का कहना है कि बारिश के दौरान दाहसंस्कार स्थल की स्थिति इतनी खराब हो गई कि अंतिम संस्कार करने में भी परेशानी होने लगी. ऐसे में स्थानीय लोगों को अपने निजी खर्च से तत्काल भरावट करानी पड़ी. यह पहल सराहनीय है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान सरकारी स्तर पर ही संभव है.

स्थानीय लोगों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मुक्ति धाम में दाहसंस्कार स्थल को पक्का एवं सुरक्षित कराने, मिट्टी कटाव रोकने, जलनिकासी की समुचित व्यवस्था करने तथा पूरे परिसर का समतलीकरण कराने की मांग की है, ताकि भविष्य में बारिश के दौरान किसी परिवार को अपने परिजन के अंतिम संस्कार के लिए इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े.

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