पंकज कुमार/न्यूज11 भारत
घाघरा/डेस्क: घाघरा थाना परिसर के पीछे बीती रात 11 : 30 को अचानक भड़की भीषण आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया और पूरे इलाके में अफरा-तफरी मचा दी. आग की चपेट में आकर थाना परिसर में रखे कई जप्त वाहन जलकर खाक हो गए, वहीं पास में स्थित एक गुमटी भी पूरी तरह राख में तब्दील हो गई.
थाने के पीछे ‘कचरा डंपिंग जोन’
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग सबसे पहले थाना के पीछे कचरा डंपिंग क्षेत्र में लगी. सवाल उठता है कि संवेदनशील थाना परिसर के ठीक पीछे कचरा फेंकने की अनुमति किसने दी? क्या यह लापरवाही नहीं, बल्कि खुला खतरा था?
खुली घेराबंदी’ ने दी आग को एंट्री
थाना परिसर के पीछे केवल खुले तार से घेराबंदी थी. इसी कमजोरी का फायदा उठाते हुए आग तेजी से अंदर घुसी और जप्त वाहनों को अपनी चपेट में ले लिया. सुरक्षा के नाम पर यह सिर्फ दिखावा था?
जप्त वाहन की सुरक्षा की जिम्मेदारी थाने की या भगवान भरोसे
इस भयावह घटना में पांच पैसेंजर टेंपो, एक टाटा मैजिक, एक मालवाहक पिकअप और कई मोटरसाइकिलें जलकर पूरी तरह नष्ट हो गईं. सवाल यह कि जब्त किए गए वाहनों की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी थी?
दमकल की टीम पहुंच आग पर पाया काबू
स्थानीय पुलिस और ग्रामीणों ने काफी कोशिश की, लेकिन आग बेकाबू रही. दमकल टीम के पहुंचने के बाद ही हालात काबू में आए. क्या समय रहते फायर सेफ्टी के इंतजाम होते तो नुकसान टल सकता था?
गरीब की रोजी रोटी पर आग, जिम्मेदार कौन?
गुमटी संचालक विमल घोष ने बताया कि उन्हें करीब 45 हजार रुपये का नुकसान हुआ. एक गरीब की रोजी-रोटी राख हो गई, लेकिन क्या उसे मुआवजा मिलेगा?
क्या बोले थाना प्रभारी
थाना प्रभारी मोहन कुमार सिंह ने बताया कि पीछे कचरा फेंका जाता था और आशंका है कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने उसमें आग लगा दी, जिससे यह बड़ी घटना हुई. फिलहाल मामले की जांच जारी है.
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