खूनी संघर्ष

गढ़वा में दो पक्षों के बीच खूनी संघर्ष, कई लोग घायल, वन भूमि पर पौधा लगाने को लेकर हुआ विवाद

आदिम जनजाति कोरवा, परहिया समुदाय और वन विभाग के बीच तनाव अब हिंसक झड़प में बदल गया है

By : Pramod Kumar , News11 Bharat
गढ़वा में दो पक्षों के बीच खूनी संघर्ष, कई लोग घायल, वन भूमि पर पौधा लगाने को लेकर हुआ विवाद

अरुण कुमार यादव/न्यूज11  भारत

गढ़वा/डेस्क: गढ़वा जिले में वन पट्टा को लेकर खूनी संघर्ष, दो पक्षो के बीच हुए विवाद के बादमारपीट की घटना मे कई लोग है घायल.गढ़वा जिले के मेराल थाना क्षेत्र के कुसमही गांव में वन भूमि पर पौधरोपण को लेकर आदिम जनजाति कोरवा एवं परहिया समुदाय तथा वन विभाग के बीच तनाव अब हिंसक झड़प में बदल गया है. सामूहिक पट्टे की जमीन पर ग्रामीणों द्वारा लगाए गए फलदार पौधों को उखाड़कर बांस रोपने और व्यक्तिगत पट्टे की जमीन में गड्ढे खोदने को लेकर रविवार को भड़की हिंसा में दो ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गए.

घटना की सूचना मिलते ही मेराल थाना प्रभारी विष्णुकांत दलबल के साथ मौके पर पहुंचे और लहूलुहान अवस्था में पड़े घायलों को अपने वाहन से गढ़वा सदर अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका इलाज चल रहा है. इस घटना के बाद से कुसमही गांव में आक्रोश और तनाव का माहौल व्याप्त है. विवाद की जड़ वर्ष 2011 में मिले वन अधिकार पट्टे से जुड़ी है. कुसमही गांव के आदिम जनजाति के कई परिवारों को वर्ष 2011 में व्यक्तिगत तथा वर्ष 2025 में सामुदायिक रूप से वन भूमि का पट्टा मिला है. नियम के अनुसार, व्यक्तिगत पट्टे वाली जमीन पर ग्रामीण खेती करते हैं, जबकि सामुदायिक पट्टे की भूमि पर वन संरक्षण और पौधरोपण का काम करते हैं. ग्रामीणों ने वन प्रबंधन के लिए विधिवत ग्राम सभा भी गठित की है.

जीविकोपार्जन को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष कुसमही टोला के ग्रामीणों ने सामुदायिक पट्टे की वन भूमि पर महुआ, आम, इमली, कटहल, मुनगा और अमरूद जैसे फलदार पौधों के बीज रोपे थे, जो अब अंकुरित होकर बाहर आ चुके हैं. इसके विपरीत, वन विभाग उक्त भूमि पर बांस के पौधे लगाना चाहता है. इसके लिए सामुदायिक पट्टे पर प्राप्त भूमि के अलावा आदिम जनजाति के लोगों को व्यक्तिगत पट्टे में मिली कुछ जमीन पर भी गड्ढे खोद दिए गए. ग्रामीणों ने इस संबंध में पहले ही मेराल के अंचल अधिकारी और गढ़वा के अनुमंडल अधिकारी को आवेदन देकर फलदार पौधे लगाए जाने की जानकारी दे दी थी.

विवाद उस वक्त हिंसक रूप ले लिया जब रविवार 26 जुलाई को वन विभाग के कर्मी पड़ोसी गांव गोबरदाहा के कुछ लोगों के साथ चार-पांच ट्रैक्टरों में बांस के पौधे भरकर कुसमही गांव के दुसयानी टोला पहुंचे. ग्राम सभा के सदस्यों की अनुमति के बिना और वन विभाग की देखरेख में पौधारोपण शुरू कर दिया गया. इस दौरान न केवल सामुदायिक भूमि पर उगे फलदार पौधों को उखाड़ फेंका जाने लगा.जब कुसमही ग्राम सभा के सदस्यों ने मौके पर पहुंचकर यह जानना चाहा कि किस अधिकारी के आदेश पर यह कार्रवाई हो रही है, तो स्थिति बिगड़ गई. आरोप है कि गोबरदाहा गांव के उदय यादव, शिवनारायण यादव, इनर यादव और नंदु यादव ने अचानक हमला बोल दिया. कुदाल से किए गए वार से 72 वर्षीय केश्वर परहिया बेहोश होकर गिर पड़े, जबकि बिरेन्द्र कोरवा का सिर फटने से वे लहूलुहान हो गए. इस दौरान रूबिया देवी एवं दुर्गा देवी के साथ भी मारपीट किया गया.

घटना की सूचना पर मौके पर पहुंचे मेराल थाना प्रभारी को पीड़ित सुरेंद्र कोरवा ने प्राथमिकी दर्ज करने के लिए आवेदन दिया है. थाना प्रभारी विष्णुकांत ने ग्रामीणों से वार्ता कर पूरी स्थिति की जानकारी ली है और पुलिस मामले की छानबीन में जुट गई है.

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