न्यूज़11 भारत
रांची/डेस्क: बहुचर्चित मगध आम्रपाली कोल परियोजना से जुड़े टेरर फंडिंग मामले में उग्रवादी संगठन टीपीसी के सक्रिय सदस्य बिंदुश्वर गंझू समेत 12 को 8-10 साल की सजा सुनाई गयी है. साथ ही 40-90 हजार रुपए तक का जुर्माना लगाया गया है. NIA की विशेष कोर्ट ने यह सजा सुनाई. मामले में विनोद गंझू, संजय जैन, प्रेम विकास और शुभान मियां को 8 साल की, वहीं अन्य आरोपियों को 10-10 साल की सजा सुनाई गई है. मामले में एक आरोपी आम्रपाली परियोजना सीसीएल के GM अजीत कुमार ठाकुर को साक्ष्य के अभाव में बरी किया गया है. जबकि टीपीसी कमांडर आक्रामक जी उर्फ रविंद्र गंझू की फाइल अलग कर सुनवाई चल रही है.
आरोपियों पर उग्रवादी संगठन टीपीसी को आर्थिक मदद पहुंचाने और लेवी वसूलने का गंभीर आरोप है. चतरा के मगध आम्रपाली कोल परियोजना क्षेत्र में काम करने वाले ठेकेदारों, ट्रांसपोर्टरों, DO धारकों और कोयला कारोबारियों से बड़े पैमाने पर लेवी वसूले जाते थे. लेवी नहीं देने पर जान से मारने की धमकी दी जाती थी. वसूली गई भारी भरकम राशि टीपीसी को आर्थिक रूप से मजबूत करने और उग्रवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए पहुंचाया जाता था, जिसका खुलासा साल 2016 में हुआ था. NIA ने जांच में पाया था कि सीसीएल, पुलिस, टीपीसी और शांति समिति के बीच समन्वय से टेरर फंडिंग की गई थी. उग्रवादी संगठन को लेवी देने के लिए कोयले की ढुलाई ऊंचे दर पर हो रही थी. मामले को लेकर टंडवा थाना में कांड संख्या 2/2016 के तहत प्राथमिकी दर्ज हुई थी. वहीं, मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार के निर्देश पर 13 फरवरी 2018 को NIA ने केस को टेकओवर कर जांच अपने हाथ में लिया था.
यह भी पढ़ें- JSSC CGL परीक्षा: झारखंड CID की बड़ी कार्रवाई, मुख्य आरोपी अभय तिवारी के भाई अक्षय और पत्नी को किया डिटेन