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रांची/डेस्क: अमेरिका और ईरान युद्ध के कारण जब से हार्मुज जलडमरूमध्य का संकट उत्पन्न हुआ है तब से पूरी दुनिया के सामने ऊर्जा संकट भी उत्पन्न हुआ है. क्योंकि हार्मुज जलडमरूमध्य से पूरी दुनिया में सप्लाई हो रहे कुल तेल का 20% इसी मार्ग से होता है. इस जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच काफी तनातनी भी चल रही है. इस बीच खबर है कि दक्षिण-पश्चिमी देश सीरिया ने ऐसा उपाय सुझाया है जिसे सुनकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुश हो गए हैं. इतना ही नहीं, इस सुझाव पर अमल भी शुरू हो गया है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसको लेकर सोशल मीडिया पर एक रिपोर्ट साझा की है. दरअसल, सीरिया अपनी भौगोलिक स्थिति और भूमध्यसागर तक पहुंच का लाभ उठाना चाह रहा है. सीरिया वह देश है जो खाड़ी क्षेत्र को भूमध्यसागर के साथ जमीनी मार्ग से यूरोप को जोड़ने का काम करता है. इसी जमीनी मार्ग को तेल परिवहन के रूप में विकसित करने का प्रयास वह कर रहा है. बल्कि इसकी शुरुआत भी हो चुकी है.
आखिर क्या है सीरिया का प्लान?
सीरिया की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि इसके एक तरफ भूमध्य सागर जहां बनियास, लताकिया बंदरगाह स्थित हैं और दूसरी तरफ तेल वाले खाड़ी देश है. सीरिया ने इसके लिए दो प्लान तैयार किये हैं. एक है तुरंत का प्लान यानी सड़क मार्ग. इस सड़क मार्ग से तेलों का परिवहन शुरू भी हो चुका है. इराक के बसरा से तेल टैंकर सड़क के रास्ते सीरिया के बनियास बंदरगाह तक लाए जा रहे हैं. जहां से उसे जहाज से यूरोप भेजा जा रहा है. फिलहाल, ट्रकों से रोज 2 लाख बैरल भेजना शुरू भी हो गया है।
दूसरा प्लान काफी बड़ा है. इसके लिए थोड़ा इन्तजार करना होगा. खाड़ी देशों को भूमध्यसागर से जोड़ने के लिए 1000 मील लंबी पाइपलाइन तैयार हो रही है. जो इराक के बसरा/किरकुक से सीरिया के बनियास पोर्ट तक जाएगी. इस पाइपलाइन की रोजाना क्षमता 7 लाख से 20 लाख बैरल होगी. जिस पर 47-48 हजार करोड़ रुपए खर्च होंगे. यह वही पाइपलाइन है जो 2003 में अमेरिकी हमले में बंद हो गई थी, अब इराक और सीरिया ने मिलकर इसे फिर से तैयार करना का समझौता किया है.
ईरान की दादागीरी होगी खत्म, भारत और यूरोप को होगा फायदा
स्थल मार्ग और पाइपलाइन से जब पूरी तरह से तेलों का परिवहन शुरू हो जाएगा तब निश्चित तौर पर ईरान की दादागीरी खत्म हो जाएगी, क्योंकि होर्मुज जहाजों के गुजरने की निर्भरता कम हो जाएगी. सीरिया के रास्ते तेल आने से भारत और यूरोप को सीधा फायदा होगा. क्योंकि तब तेल मंगाने इन्हें सस्ता पड़ेगा. अगर किसी कारण होर्मुज पूरी तरह बंद हो जाता तब भी भी वहां से भारत और यूरोप को तेल भेजना सस्ता पड़ेगा. इतना ही नहीं, सीरिया भी काफी फायदे में रहेगा, क्योंकि उसके पास खुद 2.5 बिलियन बैरल तेल है,
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