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रांची/डेस्क: अमेरिका और ईरान का संकट सुलझने का नाम ही नहीं ले रहा है. बड़ी उलझनों के बाद अमेरिका और ईरान ने शांति समझौते पर हस्ताक्षर किये, लेकिन यह शांति समझौता चार दिन भी नहीं टिक पाया. लेबनान को लेकर अमेरिका और ईरान फिर उलझ पड़े हैं. शांति समझौते को आगे बढ़ाने के लिए स्विटजरलैंड में बैठक शुरू भी हुई लेकिन वह 80 मिनट में ही खत्म हो गई. अमेरिका और ईरान के बीच इस तनाव का असर दुनिया को फिर झेलना पड़ेगा. ईरान ने इजराइल द्वारा लेबनान पर हमले के बाद होर्मुज स्ट्रेट को एक बार फिर बंद कर दिया है. इसका असर यह हुआ है कि कच्चे तेल की कीमत में फिर से बढ़ोतरी होने लगी है. होर्मुज स्ट्रेट को बंद होने से सोमवार को ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल दर्ज किया गया है.
ब्रेंट क्रूड 0.67% बढ़कर 81.11 डॉलर प्रति बैरल हो गया है. हालांकि यह अभी फिर 82.30 डॉलर के उच्च स्तर से थोड़ा नीचे है. वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड वायदा में तो 2.64% की बड़ी बढ़त देखी जा रही है. इस बढ़त के साथ कीमत 78.62 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है. वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों पर भारी दबाव साफ दिख रहा है.
ट्रंप की धमकी से बार-बार बिगड़ रही बात
अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बड़बोलापन और बार-बार की धमकी के कारण शांति वार्ता में भी बार-बार व्यवधान पड़ रहा है. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस अंतरिम शांति समझौते के लिए स्विजटरलैंड पहुंचे थे. ईरानी अधिकारियों के साथ उनकी अहम बैठक भी हुई. लेकिन इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को फिर से बड़े हमले शुरू करने और गंभीर परिणाम की सख्त धमकी दे डाली. वहीं तेहरान ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह लेबनान में लड़ाई रोकने की अपनी प्रतिबद्धता को पूरा करने में पूरी तरह से विफल रहा है. इन आरोप-प्रत्यारोप के कारण दोनों देशों की बैठक 80 मिनट भी नहीं चल पाई और अंतरिम शांति समझौता एक बार फिर अटक गया.
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