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रांची/डेस्क: भले ही मानसून के देश में एंट्री देर से हुई है, लेकिन मौसम विभाग बता रहा है कि मानसून पूरे देश में पहुंच चुका है, इसके बावजूद बारिश का कम होना या फिर नहीं होना सबसे हैरान कर रहा है. इसके कारण किसानों की परेशानी दिनो-दिन बढ़ती जा रही है, क्योंकि खरीफ फसलों की बुवाई भी ठीक से नहीं हो पाई है. अगर खरीफ फसलों की बुआई समय पर नहीं होगी तो देश में खाद्यान्न की कमी होना तय है. मौसम विभाग जो डाटा जारी कर रहा है, उसके अनुसार अब तक 45 फीसदी कम बारिश हुई है. यह पूरे देश की औसत बारिश का हिस्सा है, इससे यह सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि देश के कई राज्य सूखे की चपेट में भी होंगे. झारखंड राज्य की ही बात करें तो यहां 65 फीसदी कम बारिश हुई है. झारखंड के कई जिलों में तो लगभग 100 फीसदी कम बारिश हुई है. यह हाल देश के अधिकांश राज्यों में भी देखने को मिल रहा है. पिछले साल की बात करें तो इस समय तक देश की कई नदियों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गयी थी, जबकि इस बार ऐसी खबर कहीं से नहीं आ रही है.
दूसरी ओर इस समय कई राज्यों में तापमान 40 डिग्री के पार होना भी चिंता का विषय है. देश के 6 राज्यों मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली और गुजरात के शहरों में तापमान अभी भी 40 डिग्री सेल्सियस के पार चल रहा है. हरियाणा का रोहतक 43.4 डिग्री सेल्सियस के साथ देश का सबसे गर्म स्थान है.
मानसून की ताजा स्थिति की बात करें तो मध्य भारत, बंगाल की खाड़ी, पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में मानसूनी बादल दिख रहे हैं, दिल्ली-NCR, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के आसमान से बादल नदारद दिख रहे हैं. जो यह बताता है कि मानसून की प्रगति के बावजूद मौसम प्रणालियां अभी तक इस क्षेत्र में विकसित नहीं हुई हैं. मौसम वैज्ञानिक भी मान रहे हैं कि कारण मौसम प्रणालियां मजबूत नहीं हो पाई हैं जो कि बारिश में सहायक होती हैं. बिना नमी से भरी दक्षिण-पश्चिमी हवाएं अपेक्षाकृत कमजोर रहती हैं, जिसके चलते तेज बारिश नहीं हो पाती है. छिटपुट बारिश ही होकर रह जाती है.
अगर मौसम विभाग की मानें तो भूमध्य रेखा के उत्तर में पूर्वी हिंद महासागर के ऊपर एक मौसम प्रणाली विकसित हो रही है. इसका प्रभाव अगले 5-7 दिनों में दिखेगा. जब यह प्रणाली बंगाल की खाड़ी में प्रवेश करेगी तो मानसूनी हवाओं में मजबूत आएगी और उसकी सक्रियता बढ़ेगी. यानी इन मौसम प्रणालियों के मजबूत होने पर मानसून की सक्रियता के बढ़ने की सम्भावना है. मौसम विभाग के पूर्वानुमान अगर सही रहे तो जुलाई के पहले हफ्ते के दौरान बारिश में वृद्धि सम्भव है.
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