न्यायालय की नई शब्दावली

यौन अपराधों में मद्रास हाई कोर्ट ने बदली फैसलों की भाषा, पहल दूसरे राज्यों के लिए बने सकेगी नजीर

मद्रास हाई कोर्ट ने नई हैंडबुक जारी कर इसी के अनुरूप फैसलों की भाषा को मर्यादित रखने की दी सलाह

By : Pramod Kumar , News11 Bharat
यौन अपराधों में मद्रास हाई कोर्ट ने बदली फैसलों की भाषा, पहल दूसरे राज्यों के लिए बने सकेगी नजीर

न्यूज11  भारत

रांची/डेस्क: यौन अपराधों पर फैसला सुनाते समय जजों को मर्यादित शब्दावली का इस्तेमाल करने की सलाह देते हुए मद्रास हाई कोर्ट ने अपने यहां इसकी शुरुआत भी कर दी है. मद्रास हाई कोर्ट ने यौन अपराधों की संवेदनशीलता और पीड़िता की मर्यादा को ध्यान में रखते हुए यह शुरुआत की है. उम्मीद है कि मद्रास हाई कोर्ट की यह शुरुआत दूसरे राज्यों के लिए भी नजीर बनेगी. मद्रास हाई कोर्ट ने इसकी पहल ‘जजमेंट्स एंड जेंडर’ नामक एक हैंडबुक के साथ कर भी दी है. यह हैंडबुक न्यायाधीशों से अपेक्षा करती है कि यौन अपराधों तथा अन्य संवेदनशील मामलों में पीड़ितों की मर्यादा को ध्यान में रखते  हुए इसमें उल्लिखित शब्दों का प्रयोग करेंगे. मद्रास हाई कोर्ट ने यह पहल सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश और गाइडलाइन के आधार पर की है. सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी, 2026 के हैंडबुक तैयार करने का निर्देश दिया था.

शुरुआत की पृष्ठभूमि

इस पहल की पृष्ठभूमि इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक आदेश से जुड़ी हुई है. मामला एक नाबालिग लड़की के साथ कथित यौन अपराध से जुड़ा था. मामले को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कथित कृत्य को 'दुष्कर्म के प्रयास' के बजाय उसकी ‘तैयारी’ की श्रेणी माना था. बाद में इसी फैसले को बदलते हुए हाई कोर्ट के आदेश को निरस्त कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की पीठ यह फैसला सुनाया था. हाई कोर्ट के फैसले को बदलने के साथ सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी को यौन अपराधों और ऐसे संवेदनशील मामलों में न्यायाधीशों के लिए दिशा-निर्देश तैयार करने को कहा था.

पुराने शब्दों की जगह दूसरे शब्दों के प्रयोग की सलाह

मद्राह हाई कोर्ट ने जो हैंडबुक न्यायाधीशों के लिए तैयार की है उसमें स्पष्ट निर्देश दिया गया है आदेशी दस्तावेज में ‘प्रॉसिक्यूट्रिक्स’, ‘आउटरेज्ड द मॉडेस्टी’, ‘हेल्पलेस फीमेल’ और ‘लस्ट’ जैसी शब्दावली का प्रयोग न किया जाए. बल्कि उसके स्थान पर ‘सर्वाइवर’, ‘सेक्सुअल असॉल्ट’ और ‘वायलेशन ऑफ बॉडिली ऑटोनॉमी’ जैसी अधिक संवेदनशील शब्दावली अपनाई जाए. इसके साथ महिलाओं के संबंधों को लेकर ‘कंक्यूबाइन’, ‘कीप’ और ‘मिस्ट्रेस’ जैसे शब्दों का प्रयोग न हो, उसके स्थान पर ‘पार्टनर’ शब्द इस्तेमाल करने की सिफारिश की. ‘प्रॉस्टिट्यूट’ के बजाय ‘सेक्स वर्कर’ का प्रयोग करने को कहा गया.

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