न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क : पटना के बहुचर्चित NEET छात्रा मौत मामले ने एक बार फिर कानूनी गलियारों में हलचल तेज कर दी है। पटना सिविल कोर्ट में हुई हालिया सुनवाई के दौरान जांच की कछुआ चाल से लेकर हॉस्टल सील होने के कारण सड़क पर आए परिवारों के मुद्दे पर घंटों बहस हुई। अदालत ने इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल दागते हुए कई अहम निर्देश जारी किए हैं।
हॉस्टल सील होने से बेघर हुए परिवारों का मुद्दा
यह पूरी कानूनी जद्दोजहद बेऊर जेल में बंद हॉस्टल मालिक मनीष रंजन के वकील द्वारा दायर याचिका पर शुरू हुई। याचिका में दलील दी गई कि शंभु गर्ल्स हॉस्टल की बिल्डिंग को सील किए जाने के कारण उसके ऊपरी तलों पर रहने वाले कई निर्दोष परिवार बेघर हो गए हैं। इन परिवारों का छात्रा की मौत के मामले से कोई लेना-देना नहीं है, फिर भी उन्हें सजा भुगतनी पड़ रही है। बचाव पक्ष ने कोर्ट से इन परिवारों के लिए वैकल्पिक आवास या राहत की मांग की।
सरकारी पक्ष और परिजनों ने किया विरोध
सुनवाई के दौरान सरकारी अधिवक्ता सुरेश कुमार ने बिल्डिंग खोलने की मांग का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि अभी जांच प्रक्रिया नाजुक मोड़ पर है और इस समय बिल्डिंग को खोलना साक्ष्यों (Evidence) के साथ छेड़छाड़ का कारण बन सकता है। वहीं, मृतका के परिजनों के वकील ने सीबीआई की सुस्त रफ्तार पर नाराजगी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि दो महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी एजेंसी किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है, जिससे न्याय मिलने में देरी हो रही है।
कोर्ट की CBI को फटकार और कड़े सवाल
दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने CBI को जांच में तेजी लाने का निर्देश दिया। कोर्ट ने एजेंसी से तीन मुख्य बिंदुओं पर जवाब मांगा है:
- घटना के कितने दिनों बाद बिल्डिंग को आधिकारिक रूप से सील किया गया?
- मामले की शुरुआती जांच करने वाली SIT की रिपोर्ट कितनी विश्वसनीय है?
- क्या सीबीआई अब तक की पुलिसिया जांच से संतुष्ट है या नए सिरे से साक्ष्य जुटा रही है?
क्या है पूरा मामला?
यह दर्दनाक घटना 7 जनवरी की है, जब जहानाबाद की रहने वाली एक छात्रा हॉस्टल में संदिग्ध परिस्थितियों में बेहोश मिली थी। 11 जनवरी को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। परिजनों ने दुष्कर्म का गंभीर आरोप लगाया, जबकि पुलिस शुरुआत में इसे सामान्य मौत बता रही थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दुष्कर्म की आशंका जताए जाने के बाद जनाक्रोश भड़क उठा और कारगिल चौक पर घंटों प्रदर्शन हुआ। दबाव बढ़ता देख सरकार ने 12 जनवरी को जांच सीबीआई को सौंप दी थी।
इस मामले में हॉस्टल मालिक मनीष रंजन पिछले तीन महीनों से जेल में है। निचली अदालत से जमानत याचिका खारिज होने के बाद अब पटना हाईकोर्ट में अर्जी दी गई है। फिलहाल, सभी की निगाहें 10 अप्रैल को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं।