न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क: मुजफ्फरपुर के लोगों के लिए अब सफर न केवल सस्ता होगा, बल्कि मेट्रो शहरों की तरह आरामदायक भी होने वाला है। प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना को धरातल पर उतारने के लिए प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी है। इस हाईटेक बस सेवा के शुरू होने से आम जनता को उमस और भीड़भाड़ वाले परिवहन से मुक्ति मिलेगी और शहर को एक मॉडर्न ट्रांसपोर्ट सिस्टम मिलेगा।
केंद्रीय टीम ने दी हरी झंडी
परिवहन विभाग की तैयारियों का जायजा लेने के लिए हाल ही में एक केंद्रीय टीम मुजफ्फरपुर पहुंची। इमलीचट्टी स्थित डिपो में बन रहे आधुनिक चार्जिंग सेंटर का निरीक्षण करते हुए टीम के सदस्य सत्यम ठाकुर ने कार्य की प्रगति पर संतोष जताया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि प्रोजेक्ट का 80 फीसदी काम पूरा हो चुका है। अब बस फिनिशिंग टच दिया जा रहा है, ताकि जल्द से जल्द बसों का परिचालन शुरू किया जा सके।
एक साथ चार्ज होंगी 15 बसें: पर्यावरण को मिलेगा 'ग्रीन' सिग्नल
इस डिपो की सबसे बड़ी खासियत यहाँ की चार्जिंग क्षमता है। अत्याधुनिक उपकरणों से लैस इस सेंटर में एक साथ 14 से 15 इलेक्ट्रिक बसों को चार्ज किया जा सकेगा। पूरी तरह बिजली से चलने वाली ये बसें धुआं और शोर नहीं करेंगी, जिससे मुजफ्फरपुर की आबोहवा भी शुद्ध रहेगी। यह कदम शहर को 'स्मार्ट और ग्रीन' बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
इन प्रमुख रूटों पर मिलेगी बेहतरीन कनेक्टिविटी
प्रशासन ने बसों के परिचालन के लिए उन रास्तों को प्राथमिकता दी है जहाँ यात्रियों का दबाव सबसे अधिक रहता है। मुजफ्फरपुर से चलने वाली ये ई-बसें मुख्य रूप से पटना, दरभंगा, मोतिहारी, शिवहर, सीतामढ़ी, औराई और कटरा चामुंडा स्थान जैसे महत्वपूर्ण रूटों पर सरपट दौड़ेंगी। अलग-अलग रूट पर बसों की संख्या भी तय कर दी गई है, जिससे प्रतिदिन सफर करने वाले नौकरीपेशा लोगों और छात्रों को समय पर बस की सुविधा मिल सके और उनका सफर सुगम हो सके।
62 करोड़ के बजट से संवरेगा पूरे बिहार का ट्रांसपोर्ट
बिहार के 6 प्रमुख शहरों—मुजफ्फरपुर, पटना, गया, भागलपुर, दरभंगा और पूर्णिया—में कुल 400 इलेक्ट्रिक बसें चलाई जानी हैं। इस पूरे इंफ्रास्ट्रक्चर को तैयार करने के लिए सरकार 62.83 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। इससे न केवल यातायात सुगम होगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के सैकड़ों नए अवसर भी पैदा होंगे।