न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क
पूजा शर्मा ( संवाददाता ) / पटना - पटना में पड़ रही भीषण गर्मी के बीच महावीर मंदिर प्रशासन ने NEET परीक्षार्थियों के लिए विशेष व्यवस्था करने का निर्णय लिया है। 21 जून 2026 को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) के दिन मंदिर की ओर से 1000 किलो चने के सत्तू से तैयार ठंडा शर्बत वितरित किया जाएगा। मंदिर प्रशासन का उद्देश्य परीक्षा देने आने वाले छात्रों को तेज गर्मी और उमस से राहत पहुंचाना है। इस सेवा कार्य को लेकर मंदिर परिसर में तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं। प्रशासन का मानना है कि गर्मी के कारण परीक्षार्थियों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसलिए यह पहल की जा रही है।
हाईलाइट्स -
- NEET परीक्षा के दिन महावीर मंदिर करेगा 1000 किलो सत्तू शर्बत का वितरण
- पटना जंक्शन और मंदिर परिसर के आसपास होगी विशेष व्यवस्था
- भीषण गर्मी से राहत देने के लिए सेवाभाव के तहत पहल
- नैवेद्यम लड्डू प्रभारी आर. शेषाद्री की देखरेख में चलेगी व्यवस्था
पटना जंक्शन और मंदिर परिसर में होगी व्यवस्था
महावीर मंदिर प्रशासन के अनुसार, शर्बत वितरण की व्यवस्था पटना जंक्शन और महावीर मंदिर परिसर के आसपास की जाएगी। हर वर्ष की तरह इस बार भी बिहार समेत दूसरे राज्यों से बड़ी संख्या में छात्र NEET परीक्षा देने पटना पहुंचेंगे। परीक्षा दोपहर 2 बजे से शुरू होगी, ऐसे में तेज धूप और गर्म हवाओं के बीच छात्रों को राहत देने के लिए ठंडे सत्तू के शर्बत का वितरण किया जाएगा। मंदिर प्रशासन का कहना है कि सत्तू शरीर को ठंडक पहुंचाने के साथ ऊर्जा भी देता है, इसलिए इसे विशेष रूप से चुना गया है। इससे परीक्षार्थियों को गर्मी से राहत मिलेगी और वे बेहतर तरीके से परीक्षा पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।
सेवाभाव से जुड़ी पहल, आर. शेषाद्री करेंगे निगरानी
मंदिर प्रशासन ने बताया कि शर्बत वितरण की पूरी व्यवस्था नैवेद्यम लड्डू प्रभारी आर. शेषाद्री की देखरेख में की जाएगी। वितरण केंद्रों पर पर्याप्त संख्या में स्वयंसेवकों की भी तैनाती की जाएगी, ताकि परीक्षार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। महावीर मंदिर प्रशासन ने कहा कि यह पहल पूरी तरह सेवाभाव से प्रेरित है और इसका उद्देश्य छात्रों की मदद करना है। प्रशासन का मानना है कि परीक्षा के दौरान मानसिक दबाव के साथ मौसम की मार भी छात्रों पर असर डालती है, इसलिए उन्हें छोटी-छोटी सुविधाएं उपलब्ध कराना जरूरी है। मंदिर की इस पहल की छात्रों और अभिभावकों द्वारा भी सराहना की जा रही है।
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