न्यूज 11 भारत/ बिहार डेस्क
अभिषेक कुमार/ पटना: बिहार की जेलों में अब कैदी पेट्रोल पंप चलाएंगे। गृह (कारा) विभाग ने इसे लेकर विस्तृत प्रारूप तैयार किया है। जेल प्रशासन की खाली पड़ी जमीन पर पेट्रोल पंप स्थापित करने की योजना है। इन पेट्रोल पंपों के संचालन का दायित्व उस जेल में रहने वाले कैदियों को ही सौंपा जाएगा। गृह (कारा) विभाग द्वारा प्रस्ताव को वित्त विभाग की मंजूरी के लिए भेजा गया है। इसके बाद विधि विभाग से भी मंजूरी ली जाएगी। राज्य मंत्रिपरिषद की मंजूरी के बाद इसे लागू किया जाएगा। राज्य सरकार की मंजूरी के बाद गृह (कारा) विभाग पेट्रोलियम कंपनियों के साथ पेट्रोल पंप संचालन के लिए समझौता (एमओयू) करेगा। कारा विभाग का हिन्दुस्तान पेट्रोलियम के साथ पहले ही करार करने का निर्णय है। पेट्रोल पंप आवंटन के बाद उसे जेलों की खाली पड़ी जमीन पर लगाया जाएगा।
सुधार प्रक्रिया से जुड़े कैदी संभालेंगे दायित्व
मिली जानकारी के अनुसार, जेलों में लंबे समय से सजा भुगतने वाले वैसे कैदी जो सुधार प्रक्रिया में शामिल हैं, उन्हें इसके संचालन का दायित्व दिया जाएगा। जेलों में सजायाफ्ता या विचाराधीन खूंखार एवं गंभीर अपराध के आरोपी कैदियों को संचालन का दायित्व नहीं सौंपा जाएगा। इन पेट्रोल पंपों पर होने वाली पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री की निगरानी के लिए भी तंत्र विकसित करने की योजना है।
59 जेलों में करीब 60 हजार है कैदी
बिहार में आठ केंद्रीय कारागारों समेत कुल 59 जेलों की क्षमता 47,750 है, लेकिन इन जेलों में 61,891 कैदी हैं। यानी जेलों में क्षमता के मुकाबले 30 फीसदी अधिक कैदी हैं। जेलों में उद्यमिता के विकास, योग, ध्यान एवं सुधार के भी कई कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।
कैदियों को मिलेगी मजदूरी
पेट्रोल पंप के संचालन का दायित्व संभालने वाले कैदियों को पारिश्रमिक दिया जाएगा। कैदियों को जेल मैनुअल के अनुसार ही राशि मिलेगी। वर्तमान में, जेलों में विभिन्न प्रकार के उत्पादन कार्यों में जुड़े कैदियों को पारिश्रमिक का भुगतान किया जाता है।