न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क: बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बूस्ट देने और मछली पालन के क्षेत्र में राज्य को आत्मनिर्भर बनाने के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी 15 जून को भोजपुर का दौरा करेंगे। सीएम उदवंतनगर प्रखंड की नवादावेन पंचायत स्थित ऐतिहासिक बाणासुर मत्स्य बीज प्रक्षेत्र पहुंचेंगे। यहाँ वे बिहार के बेहद महत्वाकांक्षी 'इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क' की आधारशिला रखेंगे। इस ऐतिहासिक शिलान्यास कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री वहाँ उपस्थित जनसमुदाय को भी संबोधित करेंगे, जिसे लेकर जिला प्रशासन ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।
खाकी और प्रशासन मुस्तैद; सुरक्षा से लेकर वीआईपी रूट तक का ब्लूप्रिंट तैयार
मुख्यमंत्री के इस हाई-प्रोफाइल दौरे को देखते हुए भोजपुर के जिलाधिकारी (डीएम) ने आला अधिकारियों की फौज मैदान में उतार दी है। कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम, ट्रैफिक डायवर्जन, मेडिकल टीम की तैनाती, वीआईपी लाउंज और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं को मुकम्मल करने की जिम्मेदारी तय कर दी गई है। वरिष्ठ अधिकारी लगातार आयोजन स्थल का मुआयना कर पल-पल की रिपोर्ट ले रहे हैं।
32 एकड़ में फैलेगा आधुनिक जल-साम्राज्य, केंद्र और राज्य मिलकर उठाएंगे खर्च
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत तैयार होने वाला यह मेगा प्रोजेक्ट कुल 32 एकड़ की विशाल भूमि पर विकसित किया जाएगा। इस पूरे प्रोजेक्ट पर ₹31.20 करोड़ की भारी-भरकम राशि खर्च होने का अनुमान है। वित्तीय मॉडल के तहत इसमें केंद्र सरकार 60 फीसदी यानी ₹18.72 करोड़ और बिहार सरकार 40 फीसदी यानी ₹12.48 करोड़ का योगदान दे रही है। इसका मुख्य उद्देश्य सूबे में मत्स्य उत्पादन की तकनीक को पूरी तरह डिजिटल और ग्लोबल स्टैंडर्ड का बनाना है।
नेशनल लेवल की 'मछली नर्सरी' से चमकेगी किसानों की किस्मत
इस एक्वा पार्क के भीतर एक हाई-टेक कॉर्प हैचरी (मछली प्रजनन इकाई) का निर्माण किया जाएगा। यहाँ राष्ट्रीय स्तर के उन्नत और रोगमुक्त मत्स्य बीज तैयार किए जाएंगे। अब तक बिहार के किसानों को अच्छी क्वालिटी के बीजों के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन इस आधुनिक लैब के शुरू होने से स्थानीय स्तर पर ही उत्तम क्वालिटी के बीज बेहद किफायती दामों पर मिलने लगेंगे।
सिर्फ मछली पालन नहीं, अब 'एक्वा टूरिज्म' का भी बड़ा केंद्र बनेगा भोजपुर
यह परियोजना सिर्फ कारोबार तक सीमित नहीं रहने वाली है, बल्कि इसे एक शानदार टूरिस्ट स्पॉट के रूप में भी ग्रूम किया जाएगा। यहाँ 'एक्वा टूरिज्म' (जल कृषि पर्यटन) को बढ़ावा देने के लिए विशेष इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार होगा। इसके जरिए आम लोग और छात्र यहाँ आकर मॉडर्न फिश फार्मिंग की बारीकियों को लाइव देख सकेंगे।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लगेंगे पंख; रोजगार के खुलेंगे हजारों नए रास्ते
इस इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क के चालू होते ही स्थानीय युवाओं और बेरोजगारों के लिए डायरेक्ट और इनडायरेक्ट रोजगार के हजारों नए अवसर पैदा होंगे। किसानों को न सिर्फ नई तकनीक की ट्रेनिंग मिलेगी, बल्कि मार्केटिंग के लिए भी एक बड़ा प्लेटफॉर्म मिलेगा। अधिकारियों का दावा है कि इस ड्रीम प्रोजेक्ट के पूरा होते ही बिहार पूरे देश में मत्स्य बीज उत्पादन के मामले में एक लीडर स्टेट बनकर उभरेगा।