Trump की टैरिफ धमकी और क्रैश हुआ Stock Market, लगातार पांचवें दिन गिरावट, निवेशक...

Trump की टैरिफ धमकी और क्रैश हुआ Stock Market, लगातार पांचवें दिन गिरावट, निवेशकों के 13 लाख करोड़ रुपये साफ!

trump की टैरिफ धमकी और क्रैश हुआ stock market लगातार पांचवें दिन गिरावट निवेशकों के 13 लाख करोड़ रुपये साफ

न्यूज़11 भारत
नई दिल्ली/डेस्क: 
भारतीय शेयर बाजार के लिए बीता सप्ताह निवेशकों की परीक्षा लेने वाला रहा. पूरे हफ्ते बाजार पर बिकवाली का दबाव बना रहा और हर कारोबारी दिन के साथ माहौल और कमजोर होता चला गया. सोमवार से शुक्रवार तक लगातार गिरावट के चलते सेंसेक्स करीब 2,200 अंक टूट गया, जिससे निवेशकों की चिंता साफ नजर आई.

सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को भी बाजार संभल नहीं पाया. बीएसई सेंसेक्स 604 अंकों की गिरावट के साथ 83,576 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 193 अंक फिसलकर 25,683 के स्तर पर आ गया. बैंकिंग शेयरों में भी कमजोरी दिखी और निफ्टी बैंक इंडेक्स 435 अंकों की गिरावट के साथ बंद हुआ.

बाजार की चौड़ाई भी कमजोर रही. बीएसई के टॉप-30 शेयरों में से 21 शेयर नुकसान में रहे, जबकि सिर्फ 9 शेयरों में ही हल्की तेजी देखने को मिली. पिछले पांच कारोबारी दिनों में सेंसेक्स कुल 2,186 अंक टूट चुका है और निफ्टी करीब 2.5 फीसदी फिसल गया है.

निवेशकों की जेब पर असर
इस गिरावट का सबसे बड़ा असर निवेशकों की संपत्ति पर पड़ा है. लगातार पांच सत्रों की कमजोरी के दौरान बीएसई का कुल मार्केट कैप 13.37 लाख करोड़ रुपये घट गया. सिर्फ शुक्रवार को ही बाजार पूंजीकरण 4.38 लाख करोड़ रुपये घटकर 467.87 लाख करोड़ रुपये रह गया, जो एक दिन पहले 472.25 लाख करोड़ रुपये था. बड़े शेयरों के साथ-साथ मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में भी बिकवाली दिखी, जिससे छोटे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई.

बाजार क्यों फिसला?
विशेषज्ञों के मुताबिक, बाजार की कमजोरी के पीछे सबसे बड़ी वजह वैश्विक स्तर पर बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है. अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम के बयान ने निवेशकों को और सतर्क कर दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसे विधेयक को मंजूरी दी है, जिससे रूस से तेल खरीदने वाले देशों, जैसे भारत, चीन और ब्राजील पर 500 फीसदी तक टैरिफ लगाया जा सकता है.

इसके साथ ही विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया. 8 जनवरी को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 3,367.12 करोड़ रुपये की निकासी की.

वैश्विक बाजारों से भी कोई खास राहत नहीं मिली. एशियाई बाजारों में कमजोरी, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर अनिश्चितता और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ से जुड़े मामले पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार, इन सभी कारणों ने बाजार की अस्थिरता को बढ़ा दिया.

 कच्चे तेल ने बढ़ाई परेशानी
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भी निवेशकों के लिए चिंता का बड़ा कारण बनी हुई हैं. भारत की आयातित तेल पर भारी निर्भरता को देखते हुए, भू-राजनीतिक तनाव के चलते तेल कीमतों में आई तेजी ने महंगाई और चालू खाते के घाटे को लेकर आशंकाएं बढ़ा दी हैं. इसका सीधा असर शेयर बाजार की धारणा पर पड़ा है.

कुल मिलाकर, वैश्विक अनिश्चितताओं, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कच्चे तेल की महंगाई के चलते भारतीय शेयर बाजार फिलहाल दबाव में है. आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों और नीतिगत घटनाक्रमों पर टिकी रहेगी.

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