नंद किशोर राम कौन हैं? पहली बार विधायक बनते ही सम्राट कैबिनेट में एंट्री, चंपारण...

नंद किशोर राम कौन हैं? पहली बार विधायक बनते ही सम्राट कैबिनेट में एंट्री, चंपारण के इस नेता की जानें पूरी कहानी !

रामनगर से पहली बार विधायक बने नंद किशोर राम अब सीधे सम्राट चौधरी कैबिनेट में शामिल होकर सुर्खियों में हैं। भाजपा के इस फैसले को चंपारण की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

नंद किशोर राम कौन हैं पहली बार विधायक बनते ही सम्राट कैबिनेट में एंट्री चंपारण के इस नेता की जानें पूरी कहानी

नंद किशोर राम कौन हैं? |

न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क

पटना -  पश्चिमी चंपारण की रामनगर (सुरक्षित) सीट से भाजपा विधायक नंद किशोर राम ने 2025 के विधानसभा चुनाव में पहली बार जीत दर्ज की। उन्होंने राजद के सुबोध कुमार को बड़े अंतर से हराकर राजनीतिक हलकों को चौंका दिया। खास बात यह रही कि भाजपा ने इस सीट पर वरिष्ठ नेता और पद्मश्री भागीरथी देवी का टिकट काटकर उन पर भरोसा जताया था, जिसे उन्होंने पूरी तरह सही साबित किया।

हाईलाइट्स - 

  • पहली बार विधायक बने नंद किशोर राम को कैबिनेट में मिली एंट्री
  • रामनगर सीट से 35 हजार से अधिक वोटों से दर्ज की थी बड़ी जीत
  • भाजपा ने भागीरथी देवी की जगह उन पर जताया था भरोसा
  • संगठन से निकलकर सीधा सत्ता के केंद्र तक पहुंच
  • चंपारण की राजनीति में बदला सामाजिक और राजनीतिक समीकरण
     

संगठन से निकला चेहरा, धीरे-धीरे बना भरोसेमंद नेता

53 वर्षीय नंद किशोर राम राजनीति में आने से पहले सामाजिक कार्यों से जुड़े रहे और भाजपा संगठन में बगहा जिला उपाध्यक्ष जैसी जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। उनकी पहचान एक ऐसे नेता की रही है जो जमीन से जुड़े मुद्दों पर लगातार सक्रिय रहते हैं। ‘अंत्योदय’ की विचारधारा के प्रति उनकी निष्ठा और सरल छवि ने उन्हें पार्टी के भीतर मजबूत आधार दिया।

 कैबिनेट एंट्री के बाद चंपारण की राजनीति में नया समीकरण

सम्राट चौधरी कैबिनेट में शामिल होने के बाद नंद किशोर राम का कद तेजी से बढ़ा है। इसे भाजपा की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, जिसके तहत चंपारण और अनुसूचित जाति बहुल क्षेत्रों में संगठन को और मजबूत करने की कोशिश है। उन्हें भागीरथी देवी के राजनीतिक उत्तराधिकारी के तौर पर भी देखा जा रहा है, जिससे क्षेत्रीय राजनीति में एक नया संतुलन बनता दिख रहा है। उन्हें भागीरथी देवी के राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में भी देखा जा रहा है, जिससे सामाजिक प्रतिनिधित्व और क्षेत्रीय संतुलन को नया आयाम मिला है।

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