न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क
पटना - मिथिलांचल और मैथिली भाषियों के लिए शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव सामने आया है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने अब मैथिली भाषा को अपने पाठ्यक्रम में शामिल कर लिया है। इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत बड़ा कदम माना जा रहा है, जिसके अंतर्गत कक्षा 1 से माध्यमिक स्तर तक मातृभाषा आधारित शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस फैसले की जानकारी केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने दरभंगा सांसद गोपालजी ठाकुर को पत्र के माध्यम से दी है।
हाईलाइट्स -
- CBSE पाठ्यक्रम में मैथिली भाषा को शामिल किया गया
- कक्षा 1 से माध्यमिक स्तर तक मातृभाषा के रूप में पढ़ाई का रास्ता साफ
- NCERT ने कक्षा 5 तक (संभवतः 8 तक) मैथिली माध्यम की सिफारिश की
- 22 भारतीय भाषाओं में NCERT किताबों का अनुवाद जारी
- मिथिलांचल में फैसले को ऐतिहासिक उपलब्धि माना गया
सरकार और नेतृत्व की प्रतिक्रिया, सांस्कृतिक पहचान को बताया मजबूत कदम
इस निर्णय पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर केंद्रीय मंत्री का पत्र साझा करते हुए इसे मिथिला की सांस्कृतिक धरोहर और भाषाई अस्मिता के लिए ऐतिहासिक बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि मैथिली को शिक्षा व्यवस्था में शामिल करना मिथिला क्षेत्र के लोगों के लिए गर्व की बात है और इससे आने वाली पीढ़ियों को अपनी भाषा और संस्कृति से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
मातृभाषा आधारित शिक्षा को मिलेगा बढ़ावा, NCERT ने दी सिफारिश
सरकारी पत्र के अनुसार, NCERT की समीक्षा के बाद यह सिफारिश की गई है कि कक्षा 5 तक और संभव हो तो कक्षा 8 तक मैथिली को शिक्षा के माध्यम के रूप में अपनाया जाए। इसके साथ ही NCERT की पुस्तकों का 22 भारतीय भाषाओं में अनुवाद भी किया जा रहा है, जिसमें मैथिली भी शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि मातृभाषा में प्रारंभिक शिक्षा से बच्चों की समझ और सीखने की क्षमता बेहतर होती है, साथ ही क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण को भी नई मजबूती मिलती है।
इसे भी पढ़ें - पटना में सीवर सफाई का नया युग: अब खतरनाक मेनहोल में नहीं उतरेंगे सफाई कर्मी, आएंगी हाई-टेक स्कैवेंजर मशीनें