न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क
बक्सर - बक्सर में 26.40 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित रेल ओवरब्रिज (आरओबी) उद्घाटन से पहले ही क्षतिग्रस्त हो जाने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। इस मामले को लेकर बक्सर के सांसद Sudhakar Singh ने निर्माण कार्य पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे भ्रष्टाचार और लापरवाही का जीता-जागता प्रमाण बताया है। उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि कोई पुल जनता के उपयोग में आने से पहले ही जवाब दे देता है, तो यह निर्माण एजेंसियों, अभियंताओं और संबंधित अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। सांसद ने आरोप लगाया कि पुल निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया और गुणवत्ता मानकों की अनदेखी की गई, जिसके कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई।
हाईलाइट्स -
- बक्सर में 26.40 करोड़ रुपये की लागत से बना रेल ओवरब्रिज उद्घाटन से पहले ही क्षतिग्रस्त।
- सांसद सुधाकर सिंह ने निर्माण में भ्रष्टाचार और घटिया सामग्री के इस्तेमाल का आरोप लगाया।
- रेल मंत्री से उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर FIR दर्ज करने की मांग।
- ठेकेदार, अभियंता और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग उठी।
- बंद पूर्वी रेल फाटक को तत्काल खोलने की भी मांग की गई।
रेल मंत्री से उच्चस्तरीय जांच और FIR की मांग
सांसद सुधाकर सिंह ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए। उन्होंने केंद्रीय रेल मंत्री Ashwini Vaishnaw को पत्र लिखकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा निर्माण कार्य में शामिल ठेकेदार, अभियंता और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। सांसद का कहना है कि जनता के टैक्स के पैसों से बनने वाली परियोजनाओं में इस तरह की अनियमितता न केवल सरकारी धन की बर्बादी है, बल्कि आम लोगों की सुरक्षा के साथ भी खिलवाड़ है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में भी ऐसी घटनाएं दोहराई जा सकती हैं।

बंद पूर्वी रेल फाटक खोलने की मांग, जनता में आक्रोश
सुधाकर सिंह ने यह भी मांग की है कि पुल के निर्माण के कारण बंद किए गए पूर्वी रेल फाटक को तत्काल प्रभाव से खोला जाए, ताकि स्थानीय लोगों को आवागमन में हो रही परेशानियों से राहत मिल सके। उन्होंने कहा कि पुल के उपयोग में आने से पहले ही उसके क्षतिग्रस्त हो जाने से क्षेत्र की जनता को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। एक ओर करोड़ों रुपये की परियोजना पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर लोगों को वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेना पड़ रहा है। सांसद ने सवाल उठाते हुए कहा, “जब 26.40 करोड़ रुपये खर्च किए गए, तब उद्घाटन से पहले ही पुल कैसे क्षतिग्रस्त हो गया?” उन्होंने कहा कि इस प्रश्न का जवाब जनता जानना चाहती है और सरकार को पूरी पारदर्शिता के साथ तथ्य सामने लाने चाहिए। मामले को लेकर स्थानीय लोगों में भी आक्रोश देखा जा रहा है और वे दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
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