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रांची/डेस्क: अभी की बड़ी खबर सुप्रीम कोर्ट से निकल के सामने आ रही है. बताया जा रहा है कि झारखंड में साल 2015 में निकाली गई पुलिस कांस्टेबल भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा आदेश जारी किया है. न्यायाधीश जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की कोर्ट ने 888 अभ्यर्थियों के हक में एक बड़ा कदम उठाया है. बता दें, यह 888 अभ्यर्थियों पुलिस कांस्टेबल भर्ती प्रक्रिया में लिखित परीक्षा और शारीरिक दक्षता परीक्षा पास करने के बावजूद नियुक्ति से वंचित थे. अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए निर्देश दिया है कि राज्य सरकार को पुलिस कांस्टेबल भर्ती प्रक्रिया में उम्र सीमा में छूट देते हुए इन उम्मीदवारों की दावेदारी पर विचार करे.
वहीं इस मामले में पूछताछ के दौरान यह जानकारी प्राप्त हुई कि महिला और होमगार्ड श्रेणियों में पर्याप्त योग्य उम्मीदवार न मिलने के कारण बड़ी संख्या में सीटें खाली रह गई थीं. झारखंड राज्य पुलिस भर्ती नियमावली 2014 के नियम 5(iv) के मुताबिक होमगार्ड के लिए आरक्षित 50% सीटें खाली रहने पर उन्हें गैर-होमगार्ड अभ्यर्थियों से भरा जाना चाहिए. इसी आधार पर अभ्यर्थियों ने पहले हाई कोर्ट का रुख किया था लेकिन वहां से याचिकाएं खारिज होने के बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की. वहीं इस मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए निर्देश जारी किया है. सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि आयोग इन 888 लंबित आवेदकों के दावों पर विचार करें और निर्धारित अधिकतम आयु सीमा में ढील दे.
आपकी जानकारी के लिए बता दें, सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के बाद अपना फैसला सुनाते हुए यह भी साफ कर दिया है कि 27 मई 2026 तक रिकॉर्ड में मौजूद केवल 888 उम्मीदवारों के मामलों पर ही विचार होगा और अब कोई नया आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा. वहीं राज्य सरकार के द्वारा कोर्ट में पेश किए गए आंकड़ों में फिलहाल कांस्टेबल के कुल 2,380 पद रिक्त हैं. इनमें से 1,168 पद महिलाओं के लिए आरक्षित हैं जबकि शेष 1,212 रिक्त पदों को किसी भी जेंडर के उम्मीदवारों से भरा जा सकता है.
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