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सावधान! यहां फैल रहा है इंसानों का मांस खाने वाला पैरासाइट.. 5086 मामले पार, कहीं ये 'नरभक्षी' तो नहीं?

सावधान! यहां फैल रहा है इंसानों का मांस खाने वाला पैरासाइट.. 5086 मामले पार, कहीं ये 'नरभक्षी' तो नहीं?

न्यूज़11 भारत

रांची/डेस्क: क्या आपने कभी सोचा है कि एक छोटी-सी मक्खी कितना बड़ा खतरा बन सकती हैं. यह केवल एक मामूली कीट नहीं है बल्कि एक ऐसा परजीवी है, जो जानवरों और इंसानों दोनों के लिए एक जानलेवा चुनौती बन गया हैं. यह जीवित मांस को खाकर बढ़ता है और अगर इसे रोका न जाए तो यह बड़े पैमाने पर तबाही मचा सकता हैं. इस तरह के परजीवी का वापस आना न केवल एक वैज्ञानिक चुनौती है बल्कि एक आर्थिक और सामाजिक संकट भी है जो दुनिया के कुछ सबसे महत्वपूर्ण पशुधन और कृषि क्षेत्रों को खतरे में डाल रहा हैं.
 
मेक्सिको में एक खतरनाक परजीवी (पैरासाइट) का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है, जिसने जानवरों और इंसानों दोनों को अपनी चपेट में ले लिया हैं. यह परजीवी 'स्क्रूवर्म' के नाम से जाना जाता है, जो जिंदा मांस खाकर जीवों को मौत के मुंह तक पहुंचा सकता हैं. हाल ही में जारी किये गए सरकारी आंकड़ों ने इस स्थिति की गंभीरता को उजागर किया हैं. मेक्सिको में 17 अगस्त, 2025 तक जानवरों से स्क्रूवर्म के 5,086 मामले दर्ज किये गए है, जो जुलाई के आंकड़ों से 53% की चौंकाने वाली वृद्धि हैं. इनमें से 649 मामले अभी भी सक्रिय है, जो यह दर्शाता है कि स्थिति अभी नियंत्रण से बाहर हैं.
 
यह प्रकोप एक बड़ी चिंता का विषय इसलिए बन गया है क्योंकि यह मध्य अमेरिका से शुरू होकर अब अमेरिकी सीमा के करीब पहुंच चुका हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मी के मौसम में मक्खियों के तेजी से प्रजनन करने की वजह से यह संकट और गहरा सकता हैं. 
 
स्क्रूवर्म क्या है और यह कैसे फैलता हैं?
स्क्रूवर्म का वैज्ञानिक नाम न्यू वर्ल्ड स्क्रूवर्म है. यह एक ऐसा परजीवी है, जो गर्म खून वाले जानवरों जैसे गाय, भेड़, कुत्ते, घोड़े और यहां तक कि इंसानों के घावों में अपने अंडे देता हैं. एक बार जब ये अंडे फूटते है तो उनसे निकलने वाले लार्वा अपने तेज और हुक जैसे मुंह से जीवित मांस में घुस जाते हैं. ये लार्वा लगातार मांस खाते रहते हैं, जिससे घाव और भी बड़ा होता चला जाता हैं. अगर समय पर इलाज न किया जाए, तो यह संक्रमण घातक साबित हो सकता है और पीड़ित जानवर या व्यक्ति की मौत हो सकती है। इन लार्वा को स्क्रूवर्म इसलिए कहा जाता है, क्योंकि ये मांस में घुसते समय पेच (स्क्रू) की तरह दिखाई देते हैं.
 
यह संक्रमण मुख्य रूप से मादा मक्खियों द्वारा फैलता है, जो घावों, नाक, आंखों या मुंह के पास अंडे देती हैं. गर्म और नम मौसम में इनका फैलाव और भी तेज हो जाता हैं. यह प्रकोप 2023 में मध्य अमेरिका के पनामा, कोस्टा रिका, होंडुरास और ग्वाटेमाला जैसे देशों से शुरू होकर मेक्सिको तक पहुंचा. अब यह उत्तरी अमेरिका की ओर बढ़ रहा है, जिससे अमेरिका भी अलर्ट पर हैं.
 
इलाज की बात करें तो घाव को साफ करना, लार्वा को निकालना और एंटीबायोटिक्स देना ही एकमात्र तरीका हैं. लेकिन अगर संक्रमण देर से पता चलता है, तो इसे रोकना मुश्किल हो जाता हैं. अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) के अनुसार, यह परजीवी कभी दक्षिण अमेरिका में आम था, लेकिन 1960 के दशक में अमेरिका और मेक्सिको से इसे पूरी तरह खत्म कर दिया गया था. अब इसका फिर से लौटना एक बड़ी चुनौती बन गया हैं. 
 
मामलों में वृद्धि के पीछे के कारण और प्रभाव
मेक्सिको सरकार के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में मामलों की संख्या कम थी, लेकिन अगस्त में इसमें 53% की बढ़ोतरी दर्ज की गई. कुल 5,086 मामलों में से ज्यादातर दक्षिणी मेक्सिको के चियापास राज्य में पाए गए हैं, जहां 41 इंसानों में भी यह संक्रमण मिला हैं. विशेषज्ञ नील विल्किंस के मुताबिक, गर्मियों में इस तरह की मासिक वृद्धि बेहद चिंताजनक हैं. गर्मी में मक्खियां तेजी से प्रजनन करती हैं, जिससे संक्रमण के मामले बढ़ जाते हैं. पशुओं के व्यापार और यात्रा ने भी इस परजीवी के फैलाव को रोकने में बाधा डाली हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल मेक्सिको को इस प्रकोप से 1.3 अरब डॉलर का नुकसान हुआ, क्योंकि पशुओं का निर्यात रोकना पड़ा.
 
स्क्रूवर्म का प्रभाव सिर्फ जानवरों तक सीमित नहीं हैं. यह पशुधन और वन्यजीवों के साथ-साथ अर्थव्यवस्था और इंसानों के लिए भी खतरा हैं.
 
पशुओं पर: ज्यादातर मामले गायों में मिले हैं. लार्वा मांस खाकर जानवरों को इतना कमजोर कर देते हैं कि उनकी मौत हो जाती हैं. अगर यह परजीवी अमेरिका के सबसे बड़े पशु उत्पादक राज्य टेक्सास तक पहुंचा, तो वहां 1.8 अरब डॉलर का नुकसान हो सकता हैं.
 
इंसानों पर: हालांकि इंसानों में यह दुर्लभ है, लेकिन यह घातक हो सकता हैं. मेक्सिको में 41 इंसानी मामले मिले हैं. वहीं, अमेरिका में 4 अगस्त, 2025 को पहला इंसानी मामला सामने आया. यह एक ऐसा व्यक्ति था जो एल सल्वाडोर से लौटा था. हालांकि उसका इलाज हो गया, लेकिन इस मामले ने यात्रा से जुड़े खतरे को उजागर किया.
 
अर्थव्यवस्था पर: पशुओं का निर्यात रुकने से भारी आर्थिक नुकसान हो रहा हैं. USDA का मानना है कि अगर यह प्रकोप फैला तो अमेरिका में 100 अरब डॉलर की पशुधन गतिविधियां खतरे में पड़ सकती हैं. इस खतरे से निपटने के लिए मेक्सिको में 51 मिलियन डॉलर की लागत से एक नई सुविधा बनाई जा रही हैं.
 
रोकथाम के प्रयास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग
स्क्रूवर्म को रोकने के लिए एक पुरानी लेकिन प्रभावी तकनीक 'स्टेराइल इंसेक्ट टेक्नीक' (SIT) का इस्तेमाल किया जा रहा हैं. इसमें नर मक्खियों को विकिरण से बांझ बनाकर जंगल में छोड़ा जाता हैं. ये बांझ नर मक्खियां जंगली मादाओं के साथ प्रजनन करती हैं, जिससे अंडे बांझ रहते हैं और उनकी आबादी नहीं बढ़ती.
 
मेक्सिको और अमेरिका मिलकर इस खतरे से निपटने की कोशिश कर रहे हैं. मेक्सिको ने अपनी दक्षिणी सीमा पर 51 मिलियन डॉलर की लागत से एक सुविधा बनाई हैं. पनामा में स्थित एक प्लांट हर हफ्ते 20 मिलियन प्यूपा (मक्खी के लार्वा) का उत्पादन करता है, जिसे प्रकोप के दौरान 100 मिलियन तक बढ़ाया जा सकता हैं. अमेरिकी कृषि विभाग भी मेक्सिको में एक टीम भेज रहा है ताकि रोकथाम के प्रोटोकॉल की जांच की जा सके.
 
अमेरिका भी अपनी तरफ से पूरी तैयारी कर रहा हैं. टेक्सास में एक नई स्टेराइल फ्लाई सुविधा बनाने का काम चल रहा है, जिसे बनने में दो से तीन साल लग सकते हैं. सीमा पर निगरानी बढ़ाई गई है और पशुओं के आयात पर रोक लगा दी गई हैं. साथ ही, आपातकालीन दवाओं जैसे आइवरमेक्टिन को मंजूरी दी गई है और जीन एडिटिंग और वैक्सीन पर भी शोध जारी हैं.
 
जानवरों के घावों का तुरंत इलाज और उनकी निगरानी भी रोकथाम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. USDA ने पनामा में एक जैविक बाधा (बायोलॉजिकल बैरियर) को भी मजबूत किया हैं. अगर इस प्रकोप को रोकना है, तो हर हफ्ते 500 मिलियन बांझ मक्खियों की जरूरत होगी. मेक्सिको में स्क्रूवर्म के मामलों में हुई 53% की वृद्धि एक गंभीर चेतावनी हैं. यह परजीवी, जो जीवित मांस खाकर अरबों डॉलर का नुकसान कर सकता है, अब अमेरिकी सीमा पर दस्तक दे रहा हैं. गर्मी और यात्रा से इसका फैलाव तेज हो रहा है, लेकिन स्टेराइल फ्लाई तकनीक और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से इसे रोका जा सकता हैं.
 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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