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रांची/डेस्कः- एक बार फिर से बिहार में नीतिश कुमार के अगुवाई में सरकार का गठन हो गया है. पिछले 5 दशक में जब जब यह साबित किया गया कि नीतिश कुमार इस बार बेअसर है तब-तब नितिश कुमार को लेकर चोंकाने वाला नतीजा सामने आया है. राजनीति से उभरने वाले नेताओं में एक अलग पहचान रखते हैं. ज्यादातर समाजवादी धारा के नेताओं के उलट नीतिश सरकार ने हमेशा से शासन सुधार व विकास को प्राथमिकता दी है. हालांकि विपक्षी पार्टी इसे अवसरवाद की संज्ञा भी देते हैं.
नीतिश कुमार की राजनीतिक चतुराई का बड़ा असर
कई उतार चढ़ाव के बाद नीतिश कुमार की राजनीतिक चतुराई का बड़ा असर ये रहा कि बीजेपी बिहार में अपना सीएम नहीं बना पाई. नीतिश को लागातर पाला बदलने के बाद उन्हे भले पलटू राम कहा गया लेकिन कानून व्यवस्था व प्रशासनिक सुधारों के कारण उन्हे सुशासन बाबू के तौर पर पहचान बनाई. 2024 के लोकसभा चुनावों में जेडीयू ने सीट दर सीट बीजेपी से बेहतर प्रदर्शन किया. बराबर सीटें भी जीती. यही कारण है कि केंद्र में बीजेपी को सरकार बनाने के लिए नीतिश का समर्थन लेना पड़ा.
1985 में पहली बार नीतिश कुमार हरनौत से विधायक बने
अपने शुरुआती दिनों में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद नीतिश ने सरकारी नौकरी को ठुकरा दिया और जेपी आंदोलन में कूद पड़े. लालू यादव व रामविलाश पासवान के साथ आंदोलन के दिनों में कंधे से कंधे मिलाकर चले. 1985 में पहली बार नीतिश कुमार हरनौत से विधायक बने और ठीक चार साल के बाद बहर लोकसभा से जीत कर दिल्ली पहुंच गए. इस दौरान लालू बिहार के सत्ता में शीर्ष पर थे. लालू से अलग होकर नीतिश ने एक समता पार्टी बनाई व दिनरात मेहनत के बाद पार्टी का विस्तार किया. समता पार्टी ने बिजेपी से गठबंधन किया, बाद में जेडीयू बनाई और बीजेपी के साथ बने रहे.
2005 में हुई नीतीश युग की शुरुआत
2005 के पहले चुनाव में एनडीए बहुमत से चूंक गया था. फिर विधानसभा भंग भी कर दी गई थी. फिर दोबारा हुए चुनाव में जेडीयू बीजेपी को शानदार जीत मिली वहीं लालू रावड़ी के शासन का अंत होता दिखा. सीएम बने के बाद नीतिश पहले 5 साल में कानून-व्यवस्था में भारी सुधार, सड़क-बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं में उछाल और सामाजिक न्याय को नया स्वरूप देने वाले अति पिछड़ा और महा दलित को मंजूरी दी. साथ ही लड़कियों के प्रोत्साहन के लिए भी काम किया. साइकिल व युनिफार्म जैसी योजना भी चलाई.
बार-बार गठबंधन बदलने की कहानी
2013 में मोदी को पीए का उम्मीदवार बनाए जाने के खिलाफ नीतिश ने अपने 17 साल पुराना गठबंधन तोड़ दिया था. फिर 2014 में मिली करारी हार के बाद जिम्मेदारी लेते हुए पद से इस्तीफा दे दिया था और जीतन राम मांझी को कुर्सी दे दी थी. फिर 2015 में महागठबंधन के साथ चुनाव जीता लेकिन 2017 में तेजस्वी यादव पर लगे आरोप को आधार बनाकर गठबंधन तोड़ दिया और 24 घंटे के अंदर बीजेपी के साथ सरकार बना ली.
2022 में उसने बीजेपी पर जेडीयू तोड़ने का आरोप भी लगाया और आरजेडी कांग्रेस के साथ सरकार बना ली. फिर INDIA गठबंधन की परिकल्पना के सूत्रधार भी बने. ठीक अपने पुराने अंदाज में 2024 आते आते उन्होने इंडिया ब्लॉक छोड़ कर एनडीए का दामन थाम लिया.
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