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रांची/डेस्क: नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन को सोशल मीडिया पर टैग कर उनसे जवाब मांगते हुए कहा कि माननीय मुख्यमंत्री Hemant Soren जी, मंगलवार की रात एक चौंकाने वाली घटना की जानकारी मिली है. हमें बताया गया है कि उत्पाद विभाग से एसीबी द्वारा भारी मात्रा में कागजात रात के अंधेरे में ले जाए गए. उन्होंने इसके बाद कहा कि यह किसी भी प्रकार की सामान्य डे-टू-डे प्रक्रिया का हिस्सा नहीं था, बल्कि पूरी तरह से गुप्त और संदिग्ध परिस्थितियों में अंजाम दिया गया. आश्चर्य की बात यह है कि यह पूरी कार्रवाई राज्य में अवैध रूप से पद पर बैठे डीजीपी के सीधे हस्तक्षेप एवं निगरानी में हुई हैं. बाबूलाल मरांडी ने सवाल उठाते हुए कहा कि,
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि—
➡️ आखिरकार एक ट्रक भरकर कागजात आधी रात को ही क्यों हटाए गए?
➡️ क्या एसीबी और उत्पाद विभाग के भीतर किसी बड़े भ्रष्ट खेल की तैयारी चल रही है?
➡️ क्या यह कार्रवाई कुछ चुनिंदा अधिकारियों और राजनीतिक सरगनाओं को बचाने के लिए की गई है?
इसके बाद उन्होंने जानकारी का हवाला देते हुए कहा कि हमारी जानकारी के अनुसार, यह कदम सीधे-सीधे महत्वपूर्ण साक्ष्यों को मिटाने और आने वाले समय में ED अथवा CBI की एंट्री से पहले जमीन तैयार करने का प्रयास प्रतीत होता है. यानी भ्रष्टाचार और घोटालों के सबूतों को खत्म करने की कोशिश की जा रही है. इसके बाद उन्होंने हेमंत सोरेन को उनकी जिम्मेदारियों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री जी, यह आपकी संवैधानिक जिम्मेदारी है कि राज्य की जनता के हितों की रक्षा करें और सुनिश्चित करें कि एक भी साक्ष्य नष्ट न हो.
हेमंत सरकार से सवाल पूछा गया कि क्या यह आपकी जानकारी और सहमति से हुआ है या नहीं
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि जनता यह जानने का हक रखती है कि, किसे बचाने के लिए यह खेल खेला जा रहा है और किसके इशारे पर सबूत मिटाए जा रहे हैं. उन्होंने फिर से हेमंत से सवाल पूछने के तरीके से कहा कि क्या किसी भी विभाग के काग़ज़ात बिना फ़ोटो स्टेट करवाये एवं विधिवत विस्तार पूर्वक ज़ब्ती सूचि बनवाये बिना रात के अंधेरे में गुप-चुप तरीक़े से उठाकर ले जाने का प्रावधान है? क्या यह आपकी जानकारी और सहमति से हुआ है या नहीं? फिर उन्होंने हेमंत सोरेन को अख़बारों के खबरों के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि कल अख़बारों से यह भी पता चला कि पहले भी एसीबी वाले कुछ ऐसे फ़ाइल उठाकर ले गये हैं जिसके चलते अभी शराब दुकानों के अगले आवंटन में मुश्किल हो रही है और इस वजह से राजस्व की हानि संभावित है. आखिर में उन्होंने हेमंत सोरेन को संज्ञान लेने के बारे में कहते हुए कहा कि मुख्यमंत्री जी, इस गंभीर मामले का संज्ञान लीजिये. इतिहास गवाह है कि चाहे चोर कितना भी चालाक और शातिर क्यों न हो, अंततः कोई न कोई सुराग ज़रूर छोड़ जाता है. यही सुराग एक दिन पूरे खेल को बेनकाब करेंगे.
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