संतोष श्रीवास्तव/न्यूज़ 11भारत
पलामू/डेस्क: भारतीय जनता युवा मोर्चा के बैनर तले पलामू के युवाओं ने राज्य की हेमंत सोरेन सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. डॉ. विपुल गुप्ता के नेतृत्व में रविवार को मेदिनीनगर के व्यस्ततम चौहान चौक पर हेमंत सोरेन सरकार के खिलाफ उग्र प्रदर्शन किया गया. इस विरोध प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में मौजूद युवाओं का आक्रोश सातवें आसमान पर दिखा, जहां उन्होंने सरकार विरोधी जमकर नारेबाजी की और मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग की.
प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे डॉ. विपुल गुप्ता ने कहा कि झारखंड की वर्तमान सरकार युवाओं के भविष्य के साथ लगातार खिलवाड़ कर रही है. पलामू समेत पूरे प्रदेश के युवाओं में इस बात को लेकर गहरा असंतोष है कि राज्य में आयोजित होने वाली लगभग हर प्रतियोगी परीक्षा के पेपर लीक हो रहे हैं. उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा में हुए पेपर लीक प्रकरण ने युवाओं के विश्वास को पूरी तरह तोड़ दिया है. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में एक सुनियोजित तरीके से परीक्षाओं की शुचिता को भंग किया जा रहा है, जिससे मेधावी छात्र खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं.
विरोध प्रदर्शन के दौरान उत्पाद सिपाही भर्ती प्रक्रिया के दौरान हुई दुखद घटनाओं का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा. कार्यकर्ताओं ने कहा कि विगत दिनों उत्पाद सिपाही की दौड़ के दौरान प्रदेश के 20 होनहार युवाओं की जान चली गई, जिसके लिए पूरी तरह से झारखंड सरकार का गलत रवैया और कुप्रबंधन जिम्मेदार है. युवाओं की मौत को लेकर जनमानस में भारी आक्रोश व्याप्त है. भारतीय जनता युवा मोर्चा ने इन सभी घटनाओं की निष्पक्षता से जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि राज्य की पुलिस या स्थानीय जांच एजेंसियों पर अब भरोसा नहीं रहा, इसलिए पूरे मामले की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी सीबीआई से जांच कराई जानी चाहिए.
पुतला दहन कार्यक्रम के माध्यम से युवाओं ने स्पष्ट संदेश दिया कि जब तक युवाओं को न्याय नहीं मिलता और भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता नहीं आती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा. प्रदर्शन में शामिल युवाओं ने एक सुर में कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को नैतिक आधार पर तुरंत अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए क्योंकि वह राज्य के युवाओं के भविष्य को सुरक्षित रखने में पूरी तरह विफल साबित हुए हैं. इस कार्यक्रम में पलामू के विभिन्न क्षेत्रों से आए सैकड़ों युवाओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और सरकार की नीतियों के प्रति कड़ा विरोध जताया.
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