झारखंड विधानसभा के बजट सत्र का तीसरा दिन आज, प्रश्नकाल में प्रवासी श्रमिकों और क...

झारखंड विधानसभा के बजट सत्र का तीसरा दिन आज, प्रश्नकाल में प्रवासी श्रमिकों और कर्मियों की मांगों पर गरमाई बहस

झारखंड विधानसभा के बजट सत्र का तीसरा दिन आज प्रश्नकाल में प्रवासी श्रमिकों और कर्मियों की मांगों पर गरमाई बहस

न्यूज़11 भारत
रांची/डेस्क:
झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के तीसरे दिन सदन की कार्यवाही शुरू होते ही प्रश्नकाल में कई अहम मुद्दे उठाए गए. खासकर प्रवासी श्रमिकों के हितों और विभिन्न संविदा कर्मियों की मांगों को लेकर सदन में चर्चा तेज रही.

विधायक जयराम महतो ने झारखंड प्रवासी श्रमिक आयोग के गठन का मामला उठाया. उन्होंने कहा कि राज्य में 16 लाख से अधिक प्रवासी मजदूर है लेकिन इनमें से सिर्फ करीब दो लाख का ही पंजीकरण हुआ है. ऐसे में प्रवासी श्रमिकों के अधिकारों और समस्याओं के समाधान के लिए अलग आयोग का गठन जरूरी है. इस पर श्रम मंत्री संजय यादव ने जवाब देते हुए कहा कि सरकार श्रमिकों का निबंधन कराने की प्रक्रिया चला रही है. फिलहाल आयोग की जगह नियंत्रण कक्ष इस कार्य को देख रहा है, लेकिन सरकार इस प्रस्ताव पर संज्ञान लेगी.

मुआवजा और अलग निदेशालय की मांग
माले विधायक चंद्रदेव महतो ने प्रवासी श्रमिकों की घर वापसी के दौरान मौत या दुर्घटना की स्थिति में मुआवजा और अन्य सहायता सुनिश्चित करने के लिए अलग निदेशालय के गठन की मांग की. उनके अधिकृत प्रतिनिधि अरूप चटर्जी ने इस संबंध में सवाल उठाया. मंत्री संजय यादव ने इस मुद्दे पर भी सरकार की ओर से सकारात्मक विचार करने का आश्वासन दिया.

नेता प्रतिपक्ष ने भी उठाया मुद्दा
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने इसे गंभीर विषय बताते हुए कहा कि राज्य सरकार को बड़े शहरों में झारखंड के पदाधिकारियों की नियुक्ति करनी चाहिए, ताकि प्रवासी मजदूरों को हर कठिनाई में त्वरित सहायता मिल सके.

आजसू विधायक निर्मलता महतो ने सहिया, सहिया साथी, बीटीटी और एसटीटी कर्मियों की लंबित मांगों को सदन में उठाया. उन्होंने इन कर्मियों की सेवा शर्तों और मानदेय से जुड़े मुद्दों पर सरकार से ठोस निर्णय लेने की मांग की. स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने जवाब देते हुए कहा कि राज्य में कार्यरत इन कर्मियों के मुद्दों को लेकर सरकार गंभीर है और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे है. प्रश्नकाल के दौरान उठे इन मुद्दों पर सरकार के आश्वासनों के बीच अब आगे की कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी है.


झारखंड में जमीन विवाद पर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी का हमला 

झारखंड में जमीन से जुड़े मुद्दों को लेकर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि पूरे झारखंड में जमीन को लेकर गंभीर विवाद की स्थिति है और सरकार को नए सिरे से विकास की नीति बनानी चाहिए. बाबूलाल मरांडी ने कहा कि झारखंड के इतिहास में जितने भी महापुरुष हुए, उन्होंने जमीन और जल-जंगल की रक्षा के लिए संघर्ष किया। यहां के आदिवासियों के लिए खेती ही आजीविका का मुख्य साधन है, इसलिए सरकार को विशेष संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेना चाहिए.

खनिज निकालने पर जमीन की भरपाई की मांग
उन्होंने कहा कि जिनकी जमीन से खनिज संपदा निकाली जा रही है, सरकार को उनके लिए वैकल्पिक जमीन या समुचित व्यवस्था करनी चाहिए. सरकार जनता के लिए काम करती है, इसलिए उसे लोगों की तकलीफ को समझना होगा.

मुख्यमंत्री पर निशाना
नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वे उद्यमियों को आमंत्रित करने के लिए बाहर दौरे करते है लेकिन खेत-खलिहानों में जाकर किसानों की समस्याएं नहीं सुनते. उन्होंने कहा कि जिस जनता ने सत्ता में बैठाया है, वही जनता उतार भी सकती है.

बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि राज्य में जमीन के सवाल पर असंख्य लोग शहीद हुए है लेकिन वर्तमान सरकार जमीनी हकीकत से दूर है. उन्होंने कहा कि “यह अबुआ सरकार नहीं, बल्कि बाबू लोगों की सरकार बन गई है.” उनके मुताबिक, जब तक अधिकारी और सरकार जमीन पर जाकर लोगों की समस्याएं नहीं समझेंगे, तब तक समाधान संभव नहीं है. अपने बयान में उन्होंने सरकार को संवेदनशीलता और पारदर्शिता के साथ जमीन से जुड़े मामलों का स्थायी समाधान निकालने की नसीहत दी. 


विस्थापन झारखंड का सबसे बड़ा मुद्दा, विधायक रौशन लाल चौधरी का सरकार पर हमला

बीजेपी विधायक रौशन लाल चौधरी ने विस्थापन के मुद्दे को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि विस्थापन झारखंड के लिए सबसे बड़ा और संवेदनशील विषय है, लेकिन सरकार इस दिशा में ठोस पहल करने में विफल रही है.

विस्थापितों के समर्थन में भाजपा
विधायक रौशन लाल चौधरी ने कहा कि विस्थापितों के अधिकारों की लड़ाई में भाजपा हमेशा उनके साथ खड़ी है. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन तानाशाही रवैया अपना रहा है और आंदोलन के दौरान की गई गिरफ्तारियों की उन्होंने कड़ी निंदा की.

आयोग सिर्फ कागजों तक सीमित
विधायक ने कहा कि विस्थापन से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए आयोग तो बनाए गए, लेकिन वे केवल कागजों तक सीमित रह गए है. यदि सरकार ने विस्थापन आयोग को पूरी ताकत और अधिकार दिए होते, तो आज विस्थापितों की स्थिति इतनी खराब नहीं होती.

उन्होंने विशेष रूप से बड़कागांव के विस्थापितों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की उनका कहना है कि सरकार को जमीन पर जाकर विस्थापितों की समस्याएं सुननी चाहिए और पुनर्वास, मुआवजा व रोजगार के ठोस उपाय सुनिश्चित करने चाहिए. विधायक रौशन लाल चौधरी ने कहा कि जब तक विस्थापन नीति प्रभावी ढंग से लागू नहीं होगी, तब तक राज्य में असंतोष बना रहेगा.


पूर्व मंत्री योगेंद्र प्रसाद की गिरफ्तारी पर जयराम महतो की प्रतिक्रिया

बड़कागांव में पूर्व मंत्री योगेंद्र प्रसाद की गिरफ्तारी को लेकर विधायक जयराम महतो ने अपनी संवेदना व्यक्त की है. उन्होंने कहा कि इस तरह की घटना निंदनीय है और लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी बात रखना किसी भी जनप्रतिनिधि का अधिकार है.

विस्थापन बड़ा और संवेदनशील मुद्दा
जयराम महतो ने कहा कि झारखंड में विस्थापन का मुद्दा बेहद बड़ा और गंभीर है. हजारों परिवार वर्षों से पुनर्वास, मुआवजा और रोजगार की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे है. ऐसे में विस्थापितों के हक की लड़ाई लड़ना गलत नहीं कहा जा सकता. उन्होंने कहा कि सरकार को आंदोलन और विरोध की आवाज को दबाने के बजाय संवाद के जरिए समाधान निकालना चाहिए. विस्थापितों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए ठोस नीति बनाना समय की जरूरत है. विधायक ने प्रशासन से भी संयम बरतने की अपील करते हुए कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखते हुए जनभावनाओं का सम्मान करना जरूरी है.


झारखंड विधानसभा के बजट सत्र का आज तीसरा दिन हैं. आज शुक्रवार को सदन में वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर तृतीय अनुपूरक बजट पेश करेंगे. इसके साथ ही राज्यपाल के अभिभाषण पर वाद-विवाद के बाद सरकार की ओर से जवाब भी दिया जाएगा.

उम्र सीमा में छूट के संकेत
गुरुवार को सदन की कार्यवाही के दौरान संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने संकेत दिए कि झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की सिविल सेवा परीक्षा में अधिकतम आयु सीमा में राहत दी जा सकती हैं. उन्होंने बताया कि इस विषय पर हाल ही में कैबिनेट की बैठक में चर्चा हुई है और सरकार इस पर गंभीरता से विचार कर रही हैं. मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी इस मुद्दे को लेकर गंभीर है, जो अभ्यर्थी हाईकोर्ट नहीं गए थे, उन्हें भी राहत देने के विकल्पों पर विचार किया जा रहा है, ताकि सभी पात्र उम्मीदवारों को समान अवसर मिल सके.

विपक्ष ने उठाया सवाल
कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने शून्यकाल के दौरान उम्र सीमा को लेकर सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि JPSC की वर्तमान विज्ञापन तिथि के अनुसार, कटऑफ वर्ष 2026 तय किया गया है, जबकि वर्ष 2021 में कटऑफ 2016 और 2023 में 2017 था. उन्होंने आरोप लगाया कि जो सक्षम अभ्यर्थी थे, वे हाईकोर्ट गए और उन्हें आवेदन की अनुमति मिल गई, लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के आवेदन अब भी लंबित हैं. इस मुद्दे का समर्थन करते हुए विधायक अमित कुमार महतो और जयराम महतो ने भी सरकार से स्पष्ट निर्णय लेने की मांग की. सदन में आज होने वाली बहस और सरकार के जवाब पर अभ्यर्थियों की नजरें टिकी हैं.

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