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रांची/डेस्क: बड़ी जद्दोजहद के बाद रांची नगर निगम का चुनाव तो हो गया. शहर की समस्याएं तो छोड़िए, अभी नव गठित नगर निगम ही समस्याओं से ग्रसित है. बता दें कि नगर निगम चुनाव के 3 माह से अधिक बीत जाने के बाद भी रांची नगर निगम के जनप्रतिनिधियों का मानदेय तय नहीं हो पाया है. यानी बिन मानदेय के महापौर, उप महापौर और पार्षद काम किए जा रहे हैं. जनप्रतिनिधियों के क्षेत्र में जो भी थोड़ा-बहुत काम हो रहा है, वह उन्हें अपनी जेब से करना पड़ रहा है. 19 मार्च को जनप्रतिनिधियों ने शहर की जिम्मेदारी सम्भालते हुए शपथ तो ले ली, लेकिन वे अपनी जिम्मेदारियां निभाएं तो निभाएं कैसे? निगम को अब तक कोई फंड ही नहीं मिल पाया है. यानी अब भी शहर की व्यवस्था भगवान के भरोसे है!
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