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तमाड़/डेस्क: जारगो गांव में मां की दर्दनाक मौत के बाद तीन मासूम बच्चों की जिंदगी संकट में है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि घटना के कई दिन बीत जाने के बावजूद तमाड़ अंचल कार्यालय और प्रखंड प्रशासन की ओर से ठोस पहल नहीं की गई. गांव में चर्चा है कि जब तक जनप्रतिनिधि सक्रिय नहीं होते, तब तक स्थानीय प्रशासन हरकत में नहीं आता.
चार फरवरी को बदन देवी चूल्हे पर खाना बनाते समय आग की चपेट में आ गई थीं. इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. पहले ही पिता स्व. रोईदास मुंडा का साया उठ चुका था. अब राहुल मुंडा (14), पटवारी कुमारी (12) और सुभाष मुंडा (7) पूरी तरह बेसहारा हो गए हैं. दो वक्त की रोटी और पढ़ाई की चिंता ने इन मासूमों का बचपन छीन लिया है.
ग्रामीणों का आरोप है कि ऐसी गंभीर स्थिति में भी तमाड़ अंचलाधिकारी और तमाड़ प्रखंड विकास पदाधिकारी की ओर से अब तक कोई ठोस राहत नहीं पहुंचाई गई. लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है? अनाथ बच्चों को तत्काल पेंशन, राशन, आवास और शिक्षा सहायता से जोड़ना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है, लेकिन फाइलों की सुस्ती बच्चों के भविष्य पर भारी पड़ रही है.
इधर तमाड़ विधायक विकास कुमार मुंडा ने मामले का संज्ञान लेते हुए प्रशासनिक अधिकारियों को तत्काल सहायता पहुंचाने का निर्देश दिया है. उन्होंने स्पष्ट कहा, 'किसी भी हाल में क्षेत्र के लोगों को परेशानी नहीं होने दी जाएगी. इन बच्चों को त्वरित रूप से सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जाए और इनके रहने-खाने तथा पढ़ाई की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए.' विधायक ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि बच्चों का नामांकन आवासीय विद्यालय तथा कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में कराया जाए, ताकि उनकी शिक्षा बाधित न हो और उन्हें सुरक्षित वातावरण मिल सके.
गौरतलब है कि इससे पूर्व तमाड़ के सालगाडीह में भी इसी तरह की एक घटना सामने आई थी, जहां विधायक विकास कुमार मुंडा ने त्वरित संज्ञान लेकर प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देशित किया था और बच्चों के लिए बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित कराई थी. अब देखना यह है कि विधायक के निर्देश के बाद तमाड़ अंचलाधिकारी और प्रखंड विकास पदाधिकारी कितनी तेजी से जमीन पर कार्रवाई करते हैं. ग्रामीणों की निगाहें प्रशासन की सक्रियता पर टिकी हैं, क्योंकि सवाल तीन मासूमों के भविष्य का है.
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