नीरज कुमार साहू/न्यूज11 भारत
बसिया/डेस्क: कामडारा प्रखंड के कोंसा पंचायत अंतर्गत अरहरा गांव में पिछले छह महीनों से जारी गतिरोध आखिरकार समाप्त हो गया. बसिया एसडीओ जयवंती देवगम और एसडीपीओ नाजीर अख्तर की सूझबूझ और सक्रिय मध्यस्थता से सरना समाज के दो पक्षों के बीच चल रहा विवाद समझौते के साथ संपन्न हुआ. अब गांव के लोग आपसी प्रेम और भाईचारे के साथ मिलकर रहेंगे.
विवाद की मुख्य वजह
अरहरा बाजार टांड़ में कल्याण विभाग द्वारा धुमकुड़िया भवन का निर्माण कराया जाना था. इस निर्माण स्थल को लेकर ग्रामीण दो गुटों में बंट गए थे. एक पक्ष निर्माण का समर्थन कर रहा था, तो दूसरा पक्ष बाजार टांड़ की जमीन पर निर्माण का पुरजोर विरोध कर रहा था. यह विवाद इतना गहरा गया था कि पिछले शुक्रवार को कामडारा थाना परिसर में हुई 4 घंटे की लंबी बैठक भी बेनतीजा रही थी और ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी की थी.
एसडीपीओ की 'हिम्मत' और सूझबूझ से बनी बात
शुक्रवार की विफलता के बावजूद एसडीपीओ नाजीर अख्तर ने हार नहीं मानी. उन्होंने शनिवार को पुनः दोनों पक्षों को बसिया अनुमंडल कार्यालय में बैठक के लिए आमंत्रित किया.
बैठक की शुरुआत में ही ग्रामीणों ने एकता का परिचय देते हुए कहा, "हम सब एक हैं और एक साथ रहेंगे."
अधिकारियों द्वारा बार-बार समझाने और विकास की महत्ता बताने पर ग्रामीणों ने गहराई से विचार किया.
सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि धुमकुड़िया भवन का निर्माण बाजार टांड़ से 50 फीट की दूरी पर किया जाएगा. इस फैसले पर दोनों पक्ष सहमत हो गए और भविष्य में किसी भी प्रकार के विवाद न करने का संकल्प लिया.
जयवंती देवगम (अनुमंडल पदाधिकारी, बसिया), नाजीर अख्तर (एसडीपीओ, बसिया), कामडारा सीओ, बीडीओ एवं थाना प्रभारी, स्थानीय प्रमुख एवं कोंसा पंचायत के मुखिया, अरहरा गांव के सरना समाज के सैकड़ों ग्रामीण बैठक में मौजूद रहे.
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